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Q: After the death of Prabhakarvardhan his wife had bumt herself on the bank of : प्रभाकरवर्धन की पत्नी ने उसके मृत्यु के बाद किस नदी के किनारे अपना आत्मदाह कर लिया?
  • A. Yamuna/यमुना
  • B. Saraswati/सरस्वती
  • C. Ganga/गंगा
  • D. Jhelum/झेलम
Correct Answer: Option B - थानेश्वर के वर्धनों का क्रमबद्ध एवं विस्तृत इतिहास प्रभाकरवर्धन के समय से मिलता है। वस्तुत: यह इस वंश की स्वतन्त्रता का जन्मदाता था। प्रभाकरवर्धन एक शक्तिशाली राजा था। अपनी स्वतन्त्र स्थिति को सूचित करने के लिए ही उसने ‘परमभट्टारक’ तथा ‘महाराजाधिराज’ जैसी सम्मानपरक उपाधियाँ धारण कीं। प्रभाकरवर्धन की कई रानियाँ थी। इसमें यशोमती उसकी प्रधान रानी (अग्रमहिषी) थी। हूणों से युद्ध करने के पश्चात् प्रभाकर वर्धन गम्भीर रूप से बीमार हो गया और उसकी मृत्यु हो गयी तथा रानी यशोमती ने सरस्वती नदी के किनारे चिता में कूदकर आत्मदाह कर लिया।
B. थानेश्वर के वर्धनों का क्रमबद्ध एवं विस्तृत इतिहास प्रभाकरवर्धन के समय से मिलता है। वस्तुत: यह इस वंश की स्वतन्त्रता का जन्मदाता था। प्रभाकरवर्धन एक शक्तिशाली राजा था। अपनी स्वतन्त्र स्थिति को सूचित करने के लिए ही उसने ‘परमभट्टारक’ तथा ‘महाराजाधिराज’ जैसी सम्मानपरक उपाधियाँ धारण कीं। प्रभाकरवर्धन की कई रानियाँ थी। इसमें यशोमती उसकी प्रधान रानी (अग्रमहिषी) थी। हूणों से युद्ध करने के पश्चात् प्रभाकर वर्धन गम्भीर रूप से बीमार हो गया और उसकी मृत्यु हो गयी तथा रानी यशोमती ने सरस्वती नदी के किनारे चिता में कूदकर आत्मदाह कर लिया।

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थानेश्वर के वर्धनों का क्रमबद्ध एवं विस्तृत इतिहास प्रभाकरवर्धन के समय से मिलता है। वस्तुत: यह इस वंश की स्वतन्त्रता का जन्मदाता था। प्रभाकरवर्धन एक शक्तिशाली राजा था। अपनी स्वतन्त्र स्थिति को सूचित करने के लिए ही उसने ‘परमभट्टारक’ तथा ‘महाराजाधिराज’ जैसी सम्मानपरक उपाधियाँ धारण कीं। प्रभाकरवर्धन की कई रानियाँ थी। इसमें यशोमती उसकी प्रधान रानी (अग्रमहिषी) थी। हूणों से युद्ध करने के पश्चात् प्रभाकर वर्धन गम्भीर रूप से बीमार हो गया और उसकी मृत्यु हो गयी तथा रानी यशोमती ने सरस्वती नदी के किनारे चिता में कूदकर आत्मदाह कर लिया।