search
Q: According to Jainism, which one of the following is the most plausible religious exception? जैनों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन एक बहु देशव्यापी अस्तिकाय द्रव्य अपवाद है?
  • A. Jiva/जीव
  • B. Pudgal/पुद्गल
  • C. Akash/आकाश
  • D. Kaal/काल
Correct Answer: Option D - जैन धर्म के अनुसार समस्त विश्व जीव एवं अजीव नामक दो स्वतन्त्र तत्वों से मिलकर बना है। जीव चेतन तत्व है जबकि अजीव, ज्ञानरहित, अचेतन तथा जड़ तत्व है। अजीव का विभाजन 5 भागों में किया जाता है- आकाश, धर्म, अधर्म, पुद्गल तथा काल। पुद्गल के अतिरिक्त अन्य चार तत्त्व ‘अरूपी अजीव’ कहलाते हैं। इनमें से ‘काल’ को अनस्तिकाय द्रव्य कहा जाता है जबकि जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म तथा आकाश को अस्तिकाय द्रव्य कहते हैं।
D. जैन धर्म के अनुसार समस्त विश्व जीव एवं अजीव नामक दो स्वतन्त्र तत्वों से मिलकर बना है। जीव चेतन तत्व है जबकि अजीव, ज्ञानरहित, अचेतन तथा जड़ तत्व है। अजीव का विभाजन 5 भागों में किया जाता है- आकाश, धर्म, अधर्म, पुद्गल तथा काल। पुद्गल के अतिरिक्त अन्य चार तत्त्व ‘अरूपी अजीव’ कहलाते हैं। इनमें से ‘काल’ को अनस्तिकाय द्रव्य कहा जाता है जबकि जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म तथा आकाश को अस्तिकाय द्रव्य कहते हैं।

Explanations:

जैन धर्म के अनुसार समस्त विश्व जीव एवं अजीव नामक दो स्वतन्त्र तत्वों से मिलकर बना है। जीव चेतन तत्व है जबकि अजीव, ज्ञानरहित, अचेतन तथा जड़ तत्व है। अजीव का विभाजन 5 भागों में किया जाता है- आकाश, धर्म, अधर्म, पुद्गल तथा काल। पुद्गल के अतिरिक्त अन्य चार तत्त्व ‘अरूपी अजीव’ कहलाते हैं। इनमें से ‘काल’ को अनस्तिकाय द्रव्य कहा जाता है जबकि जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म तथा आकाश को अस्तिकाय द्रव्य कहते हैं।