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Q: अभिधा शब्द-शक्ति के कितने भेद हैं?
  • A. तीन
  • B. चार
  • C. दो
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - अभिधा शब्द शक्ति के तीन भेद है। हिन्दी साहित्य कोश के अनुसार- ‘‘शब्द की शक्ति उसके अन्तर्निहीत अर्थ को व्यक्त कराने वाले व्यापार है।’’ अभिधा शब्द शक्ति:- साक्षात संकेतित अर्थ (मुख्यार्थ) का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शब्द शक्ति’ कहते हैं। इसके तीन भेद हैं- 1. रूढ़ 2. यौगिक 3. योगरूढ़ लक्षणा शब्द शक्ति:- जब किसी शब्द का अभिधा के द्वारा मुख्यार्थ का बोध न हो, तब उस शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को लक्षणा शब्द शक्ति है। इसके दो भेद हैं- 1. रूढ़ा लक्षणा 2. प्रयोजनवती लक्षणा व्यंजना शब्द शक्ति :- जब किसी शब्द के अर्थ का बोध न तो मुख्यार्थ से होता है और न ही लक्ष्यार्थ से अपितु कथन के सन्दर्भ के अनुसार अलग-ललग अर्थ से या व्यंग्यार्थ से प्रकट होता हो वहाँ व्यंजना शब्द शक्ति होता है। व्यंजना शब्द शक्ति के भेद :- 1. शाब्दी व्यंजना 2. आर्थी व्यंजना
C. अभिधा शब्द शक्ति के तीन भेद है। हिन्दी साहित्य कोश के अनुसार- ‘‘शब्द की शक्ति उसके अन्तर्निहीत अर्थ को व्यक्त कराने वाले व्यापार है।’’ अभिधा शब्द शक्ति:- साक्षात संकेतित अर्थ (मुख्यार्थ) का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शब्द शक्ति’ कहते हैं। इसके तीन भेद हैं- 1. रूढ़ 2. यौगिक 3. योगरूढ़ लक्षणा शब्द शक्ति:- जब किसी शब्द का अभिधा के द्वारा मुख्यार्थ का बोध न हो, तब उस शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को लक्षणा शब्द शक्ति है। इसके दो भेद हैं- 1. रूढ़ा लक्षणा 2. प्रयोजनवती लक्षणा व्यंजना शब्द शक्ति :- जब किसी शब्द के अर्थ का बोध न तो मुख्यार्थ से होता है और न ही लक्ष्यार्थ से अपितु कथन के सन्दर्भ के अनुसार अलग-ललग अर्थ से या व्यंग्यार्थ से प्रकट होता हो वहाँ व्यंजना शब्द शक्ति होता है। व्यंजना शब्द शक्ति के भेद :- 1. शाब्दी व्यंजना 2. आर्थी व्यंजना

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अभिधा शब्द शक्ति के तीन भेद है। हिन्दी साहित्य कोश के अनुसार- ‘‘शब्द की शक्ति उसके अन्तर्निहीत अर्थ को व्यक्त कराने वाले व्यापार है।’’ अभिधा शब्द शक्ति:- साक्षात संकेतित अर्थ (मुख्यार्थ) का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शब्द शक्ति’ कहते हैं। इसके तीन भेद हैं- 1. रूढ़ 2. यौगिक 3. योगरूढ़ लक्षणा शब्द शक्ति:- जब किसी शब्द का अभिधा के द्वारा मुख्यार्थ का बोध न हो, तब उस शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को लक्षणा शब्द शक्ति है। इसके दो भेद हैं- 1. रूढ़ा लक्षणा 2. प्रयोजनवती लक्षणा व्यंजना शब्द शक्ति :- जब किसी शब्द के अर्थ का बोध न तो मुख्यार्थ से होता है और न ही लक्ष्यार्थ से अपितु कथन के सन्दर्भ के अनुसार अलग-ललग अर्थ से या व्यंग्यार्थ से प्रकट होता हो वहाँ व्यंजना शब्द शक्ति होता है। व्यंजना शब्द शक्ति के भेद :- 1. शाब्दी व्यंजना 2. आर्थी व्यंजना