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Q: Which of the following Rock Edict of Ashoka speaks of religious synthesis? निम्नलिखित में अशोक का कौन-सा शिलालेख र्धािमक संश्लेषण (समन्वय) के बारे में कहता है?
  • A. Rock Edict II/द्वितीय शिलालेख
  • B. Rock Edict XI/ग्यारहवाँ शिलालेख
  • C. Rock Edict XIII/तेरहवाँ शिलालेख
  • D. Rock Edict XII/बारहवाँ शिलालेख
Correct Answer: Option D - अशोक का इतिहास मुख्यत: उसके अभिलेखों से ही ज्ञात होता है। प्रसिद्ध इतिहासकार डी.आर. भण्डारकर महोदय ने केवल अभिलेखों के आधार पर ही अशोक का इतिहास लिखने का प्रयास किया है। सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख को पढ़ने में सफलता पायी जबकि सबसे पहले 1750 ई. में टीफेन थेलर महोदय द्वारा खोजा गया अभिलेख दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख था। अशोक अपने बारहवें शिलालेख में धार्मिक संश्लेषण (समन्वय) के बारे में कहता है। इसमें अशोक कहता है कि- सभी सम्प्रदायों के सार की वृद्धि हो, क्योंकि सबका मूल संयम है। लोग अपने सम्प्रदाय की प्रशंसा और दूसरे सम्प्रदाय की निन्दा न करें।
D. अशोक का इतिहास मुख्यत: उसके अभिलेखों से ही ज्ञात होता है। प्रसिद्ध इतिहासकार डी.आर. भण्डारकर महोदय ने केवल अभिलेखों के आधार पर ही अशोक का इतिहास लिखने का प्रयास किया है। सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख को पढ़ने में सफलता पायी जबकि सबसे पहले 1750 ई. में टीफेन थेलर महोदय द्वारा खोजा गया अभिलेख दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख था। अशोक अपने बारहवें शिलालेख में धार्मिक संश्लेषण (समन्वय) के बारे में कहता है। इसमें अशोक कहता है कि- सभी सम्प्रदायों के सार की वृद्धि हो, क्योंकि सबका मूल संयम है। लोग अपने सम्प्रदाय की प्रशंसा और दूसरे सम्प्रदाय की निन्दा न करें।

Explanations:

अशोक का इतिहास मुख्यत: उसके अभिलेखों से ही ज्ञात होता है। प्रसिद्ध इतिहासकार डी.आर. भण्डारकर महोदय ने केवल अभिलेखों के आधार पर ही अशोक का इतिहास लिखने का प्रयास किया है। सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख को पढ़ने में सफलता पायी जबकि सबसे पहले 1750 ई. में टीफेन थेलर महोदय द्वारा खोजा गया अभिलेख दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख था। अशोक अपने बारहवें शिलालेख में धार्मिक संश्लेषण (समन्वय) के बारे में कहता है। इसमें अशोक कहता है कि- सभी सम्प्रदायों के सार की वृद्धि हो, क्योंकि सबका मूल संयम है। लोग अपने सम्प्रदाय की प्रशंसा और दूसरे सम्प्रदाय की निन्दा न करें।