Correct Answer:
Option A - विकास से तात्पर्य अंगों के बेहतर और बढ़ते हुए कार्य के लिए संरचना में वृद्धि के होने से है। यह एक व्यापक और सतत प्रक्रिया हैं, इस प्रकार वह कोई उद्देश्यात्मक निश्चित क्षण नहीं होता जब कोई बच्चा मध्य बाल्यावस्था या किशोरावस्था में प्रवेश करता हैं क्योंकि विकास की प्रकृति निरंतर चलने वाली हैं विकास प्रक्रिया में नई विशेषताओं का समावेश होता हैं और पुरानी विशेषताएँ गायब हो जाती हैं। मनोवैज्ञानिक ने विकास को इन परिवर्तनों गुणों और विशेषताओं की क्रमिक और नियमित उत्पत्ति कहा हैं। अत: अभिकथन (A) व कारण (R) दोनों सही हैं एवं (A) की (R) सही व्याख्या कर रहा हैं।
A. विकास से तात्पर्य अंगों के बेहतर और बढ़ते हुए कार्य के लिए संरचना में वृद्धि के होने से है। यह एक व्यापक और सतत प्रक्रिया हैं, इस प्रकार वह कोई उद्देश्यात्मक निश्चित क्षण नहीं होता जब कोई बच्चा मध्य बाल्यावस्था या किशोरावस्था में प्रवेश करता हैं क्योंकि विकास की प्रकृति निरंतर चलने वाली हैं विकास प्रक्रिया में नई विशेषताओं का समावेश होता हैं और पुरानी विशेषताएँ गायब हो जाती हैं। मनोवैज्ञानिक ने विकास को इन परिवर्तनों गुणों और विशेषताओं की क्रमिक और नियमित उत्पत्ति कहा हैं। अत: अभिकथन (A) व कारण (R) दोनों सही हैं एवं (A) की (R) सही व्याख्या कर रहा हैं।