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Q: आधुनिक हिन्दी साहित्य की पहली आत्मकथा के लेखक कौन माने जाते है?
  • A. बाबू श्यामसुन्दर दास
  • B. देवेन्द्र सत्यार्थी
  • C. हरिवंशराय बच्चन
  • D. जयशंकर प्रसाद
Correct Answer: Option A - आधुनिक हिन्दी साहित्य की पहली आत्मकथा के लेखक बाबू श्यामसुन्दर दास कृत ‘मेरी आत्मकहानी’ (1941 ई.) को माना जाता है। हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी है जो इस प्रकार है- क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969), नीड़ का निर्माण फिर (1970), बसेरे से दूर (1978) तथा दश द्वार से सोपान तक (1985) आदि हैं। देवेन्द्र सत्यार्थी की आत्मकथा दो भागों में प्रकाशित है। प्रथम भाग ‘‘चाँद सूरज की वीरन (1952) तथा द्वितीय भाग ‘‘नील यक्षिणी’’ (1985) है। जबकि सन् 1641ई. में बनारसीदास जैन ने ब्रजभाषा पद्य में ‘अर्धकथानक’ की रचना की जिसे हिन्दी का प्रथम प्राचीनतम आत्मकथा माना जाता है।
A. आधुनिक हिन्दी साहित्य की पहली आत्मकथा के लेखक बाबू श्यामसुन्दर दास कृत ‘मेरी आत्मकहानी’ (1941 ई.) को माना जाता है। हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी है जो इस प्रकार है- क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969), नीड़ का निर्माण फिर (1970), बसेरे से दूर (1978) तथा दश द्वार से सोपान तक (1985) आदि हैं। देवेन्द्र सत्यार्थी की आत्मकथा दो भागों में प्रकाशित है। प्रथम भाग ‘‘चाँद सूरज की वीरन (1952) तथा द्वितीय भाग ‘‘नील यक्षिणी’’ (1985) है। जबकि सन् 1641ई. में बनारसीदास जैन ने ब्रजभाषा पद्य में ‘अर्धकथानक’ की रचना की जिसे हिन्दी का प्रथम प्राचीनतम आत्मकथा माना जाता है।

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आधुनिक हिन्दी साहित्य की पहली आत्मकथा के लेखक बाबू श्यामसुन्दर दास कृत ‘मेरी आत्मकहानी’ (1941 ई.) को माना जाता है। हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी है जो इस प्रकार है- क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969), नीड़ का निर्माण फिर (1970), बसेरे से दूर (1978) तथा दश द्वार से सोपान तक (1985) आदि हैं। देवेन्द्र सत्यार्थी की आत्मकथा दो भागों में प्रकाशित है। प्रथम भाग ‘‘चाँद सूरज की वीरन (1952) तथा द्वितीय भाग ‘‘नील यक्षिणी’’ (1985) है। जबकि सन् 1641ई. में बनारसीदास जैन ने ब्रजभाषा पद्य में ‘अर्धकथानक’ की रचना की जिसे हिन्दी का प्रथम प्राचीनतम आत्मकथा माना जाता है।