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Q: आर्थिक विकास का सबसे अच्छा सूचकांक किसके द्वारा प्रदान किया जा सकता है?
  • A. मौजूदा कीमतों पर राष्ट्रीय आय में वृद्धि
  • B. प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि
  • C. बचत अनुपात में वृद्धि
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - आर्थिक विकास के सूचक के रूप में अनेक प्रतिमानों का प्रयोग किया जाता है जैसे- साधन लागत पर व्यक्त वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, प्रतिव्यक्ति जी.डी.पी., राष्ट्रीय उत्पाद तथा प्रतिव्यक्ति आय आदि। उपर्युक्त प्रश्न में दिये गए विकल्पों में आर्थिक विकास का सबसे अच्छा सूचकांक- ‘प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि’ है। चूँकि प्रतिव्यक्ति आय की गणना करते समय जनसंख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। जब मौद्रिक आय को मूल्य स्तर से भाग दिया जाता है तो वास्तविक आय प्राप्त होती है और इस वास्तविक को जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति वास्तविक आय प्राप्त होती है। वर्तमान समय आर्थिक समृद्धि की माप के लिए प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि को ही अधिकाँशतया स्वीकार किया जाता है।
B. आर्थिक विकास के सूचक के रूप में अनेक प्रतिमानों का प्रयोग किया जाता है जैसे- साधन लागत पर व्यक्त वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, प्रतिव्यक्ति जी.डी.पी., राष्ट्रीय उत्पाद तथा प्रतिव्यक्ति आय आदि। उपर्युक्त प्रश्न में दिये गए विकल्पों में आर्थिक विकास का सबसे अच्छा सूचकांक- ‘प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि’ है। चूँकि प्रतिव्यक्ति आय की गणना करते समय जनसंख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। जब मौद्रिक आय को मूल्य स्तर से भाग दिया जाता है तो वास्तविक आय प्राप्त होती है और इस वास्तविक को जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति वास्तविक आय प्राप्त होती है। वर्तमान समय आर्थिक समृद्धि की माप के लिए प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि को ही अधिकाँशतया स्वीकार किया जाता है।

Explanations:

आर्थिक विकास के सूचक के रूप में अनेक प्रतिमानों का प्रयोग किया जाता है जैसे- साधन लागत पर व्यक्त वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, प्रतिव्यक्ति जी.डी.पी., राष्ट्रीय उत्पाद तथा प्रतिव्यक्ति आय आदि। उपर्युक्त प्रश्न में दिये गए विकल्पों में आर्थिक विकास का सबसे अच्छा सूचकांक- ‘प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि’ है। चूँकि प्रतिव्यक्ति आय की गणना करते समय जनसंख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। जब मौद्रिक आय को मूल्य स्तर से भाग दिया जाता है तो वास्तविक आय प्राप्त होती है और इस वास्तविक को जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति वास्तविक आय प्राप्त होती है। वर्तमान समय आर्थिक समृद्धि की माप के लिए प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि को ही अधिकाँशतया स्वीकार किया जाता है।