Explanations:
रिजर्व बैंक ने पहली बार मुद्रा की पूर्ति की अवधारणा पर विचार करने के लिए वर्ष 1961 में प्रथम कार्यकारी समूह गठित किया जिसने अपनी रिपोर्ट 1964 में दी। वर्ष 1967-68 तक R.B.I.द्वारा मुद्रा की पूर्ति का एक ही माप M प्रकाशित किया जाता था जो M= C+DD+OD के रूप में था। वर्ष 1967-68 के बाद R.B.I. ने व्यापक मुद्रा की धारणा (M₃) को स्वीकार किया। M₁ जनता के पास चलन (C) + बैंकों की शुद्ध माँग जामाएं (DD) + RBI की अन्य जामाएं (OD) M₂=M₁+ पोस्ट ऑफिस की बचत बैंक जमाएँ M₃=M₁+ बैंक तथा सहकारी बैकों की समय जमाएँ M₄=M₃+ पोस्ट ऑफिस की कुल समय जमाएँ M₁ से M₄ की तरफ जाने पर तरलता में कमी आती जाएगी। M₁ को संकीर्ण मुद्रा तथा M₃ को विस्तृत मुद्रा कहा जाता है