Correct Answer:
Option D - वक्रोक्ति के विरोधी आचार्य ‘विश्वनाथ’ हैं। वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक ‘आचार्य कुंतक’ हैं। इनका ग्रंथ वक्रोक्ति जीवितम है। साहित्य दर्पण आचार्य विश्वनाथ का ग्रंथ है। इन्होंने रस को काव्य की आत्मा माना है। इन्होंने वाक्यं रसात्मकं काव्यम् कहा है। भामह ने अलंकार को काव्य का सर्वस्व मानते हुए वक्रोक्ति को उसका प्राण स्वीकार किया है।
D. वक्रोक्ति के विरोधी आचार्य ‘विश्वनाथ’ हैं। वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक ‘आचार्य कुंतक’ हैं। इनका ग्रंथ वक्रोक्ति जीवितम है। साहित्य दर्पण आचार्य विश्वनाथ का ग्रंथ है। इन्होंने रस को काव्य की आत्मा माना है। इन्होंने वाक्यं रसात्मकं काव्यम् कहा है। भामह ने अलंकार को काव्य का सर्वस्व मानते हुए वक्रोक्ति को उसका प्राण स्वीकार किया है।