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Q: ‘‘आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपु:। नास्त्युद्यमसमो बन्धु: कृत्वा यं नावसीदति।।’’ इस श्लोक में महत्व प्रतिपादित है :
  • A. ज्ञान का
  • B. धर्म का
  • C. कर्म का
  • D. मित्र का
Correct Answer: Option C - प्रस्तुत श्लोक नीतिशतकम् (भर्तृहरि) से लिया गया है। इसमें गीता के समान कर्म की महत्ता का प्रतिपादन हुआ है, कहा गया है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है तथा उद्यम के समान कोई मित्र नहीं है।
C. प्रस्तुत श्लोक नीतिशतकम् (भर्तृहरि) से लिया गया है। इसमें गीता के समान कर्म की महत्ता का प्रतिपादन हुआ है, कहा गया है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है तथा उद्यम के समान कोई मित्र नहीं है।

Explanations:

प्रस्तुत श्लोक नीतिशतकम् (भर्तृहरि) से लिया गया है। इसमें गीता के समान कर्म की महत्ता का प्रतिपादन हुआ है, कहा गया है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है तथा उद्यम के समान कोई मित्र नहीं है।