Correct Answer:
Option D - आचार्य वामन ने ‘काव्य हेतु’ के स्थान पर ‘काव्यांग’ शब्द का प्रयोग किया है। इन्होंने लोक, विद्या और प्रकीर्ण को काव्यांग (काव्य-हेतु) स्वीकार किया है-
D. आचार्य वामन ने ‘काव्य हेतु’ के स्थान पर ‘काव्यांग’ शब्द का प्रयोग किया है। इन्होंने लोक, विद्या और प्रकीर्ण को काव्यांग (काव्य-हेतु) स्वीकार किया है-