Correct Answer:
Option B - व्याख्या- आचार्य कुन्तक ने वक्रोक्ति के छह भेद माने हैं। जो इस प्रकार है- (i) वर्ण विन्यास वक्रता (ii) पद पूर्वाध वक्रता (iii) पद-परार्ध वक्रता (iv) वाक्य वक्रता (v) प्रकरण –वक्रता (vi) प्रबन्ध वक्रता। कुंतक को वाक्रोक्ति सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है इन्होंने ‘वाक्रोक्ति जीवित’ नामक ग्रंथ की रचना की है।
B. व्याख्या- आचार्य कुन्तक ने वक्रोक्ति के छह भेद माने हैं। जो इस प्रकार है- (i) वर्ण विन्यास वक्रता (ii) पद पूर्वाध वक्रता (iii) पद-परार्ध वक्रता (iv) वाक्य वक्रता (v) प्रकरण –वक्रता (vi) प्रबन्ध वक्रता। कुंतक को वाक्रोक्ति सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है इन्होंने ‘वाक्रोक्ति जीवित’ नामक ग्रंथ की रचना की है।