Correct Answer:
Option B - ‘आचरण की सभ्यता’ सरदार पूर्ण सिंह का निबन्ध है। इनके अन्य निबन्ध है- मजदूरी और प्रेम, सच्ची वीरता, पवित्रता, कन्यादान तथा अमेरीका का मस्त कवि वाल्ट हिटमैन। जबकि सम्पत्तिशास्त्र, रसज्ञ रंजन, लेखांजलि, नाट्य शास्त्र, कालिदास के समय का भारत, दंडदेव का आत्मनिवेदन, भाषा और व्याकरण, महाकवि माघ का प्रभात वर्णन, प्रभात, नेपाल तथा म्युनिसिपैलिटी के कारनामे आदि महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध हैं। मुझे मेरे मित्रों से बचाओ, दयानन्द सरस्वती मर गए तथा हिन्दी के प्राचीन साहित्य का उद्धार आदि पद्मसिंह शर्मा के निबन्ध हैं। भाव या मनोविकार, उत्साह, श्रद्धा और भक्ति, करूणा, लज्जा और ग्लानि, लोभ और प्रीति, घृणा, ईष्र्या, भय, क्रोध, कविता क्या है, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, तुलसी का भक्तिमार्ग, मानस की धर्मभूमि, काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था, काव्य में रहस्यवाद तथा काव्य में अभिव्यंजनावाद आदि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध हैं।
B. ‘आचरण की सभ्यता’ सरदार पूर्ण सिंह का निबन्ध है। इनके अन्य निबन्ध है- मजदूरी और प्रेम, सच्ची वीरता, पवित्रता, कन्यादान तथा अमेरीका का मस्त कवि वाल्ट हिटमैन। जबकि सम्पत्तिशास्त्र, रसज्ञ रंजन, लेखांजलि, नाट्य शास्त्र, कालिदास के समय का भारत, दंडदेव का आत्मनिवेदन, भाषा और व्याकरण, महाकवि माघ का प्रभात वर्णन, प्रभात, नेपाल तथा म्युनिसिपैलिटी के कारनामे आदि महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध हैं। मुझे मेरे मित्रों से बचाओ, दयानन्द सरस्वती मर गए तथा हिन्दी के प्राचीन साहित्य का उद्धार आदि पद्मसिंह शर्मा के निबन्ध हैं। भाव या मनोविकार, उत्साह, श्रद्धा और भक्ति, करूणा, लज्जा और ग्लानि, लोभ और प्रीति, घृणा, ईष्र्या, भय, क्रोध, कविता क्या है, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, तुलसी का भक्तिमार्ग, मानस की धर्मभूमि, काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था, काव्य में रहस्यवाद तथा काव्य में अभिव्यंजनावाद आदि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध हैं।