Correct Answer:
Option D - ‘आ: अतिथिपरिभाविनि’ अस्य कथनस्य कथनकार: ‘महर्षि दुर्वासा’। यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तलं के चतुर्थ अंक का है। अभिज्ञानशाकुन्तलम् महाकवि कालिदास की विश्व प्रसिद्ध नाट्य रचना है। इसमें कुल सात अंक तथा 196 श्लोक हैं।
D. ‘आ: अतिथिपरिभाविनि’ अस्य कथनस्य कथनकार: ‘महर्षि दुर्वासा’। यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तलं के चतुर्थ अंक का है। अभिज्ञानशाकुन्तलम् महाकवि कालिदास की विश्व प्रसिद्ध नाट्य रचना है। इसमें कुल सात अंक तथा 196 श्लोक हैं।