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Q: ‘‘आ: अतिथि परिभाविनि’’ के कथनकार हैं
  • A. काश्यप
  • B. दुर्वासा
  • C. गौतम
  • D. विश्वामित्र
Correct Answer: Option B - ‘‘आ: अतिथि परिभाविनि’’ के कथनकार ‘दुर्वासा’ हैं। यह उक्ति अभिज्ञान शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क की है। दुर्वासा ऋषि, कण्व आश्रम में पहुँचते हैं, वहाँ दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न शकुन्तला जान नहीं पाती और ऋषि दुर्वासा उसके इस व्यवहार को अतिथि का अपमान समझ बैठते हैं।
B. ‘‘आ: अतिथि परिभाविनि’’ के कथनकार ‘दुर्वासा’ हैं। यह उक्ति अभिज्ञान शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क की है। दुर्वासा ऋषि, कण्व आश्रम में पहुँचते हैं, वहाँ दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न शकुन्तला जान नहीं पाती और ऋषि दुर्वासा उसके इस व्यवहार को अतिथि का अपमान समझ बैठते हैं।

Explanations:

‘‘आ: अतिथि परिभाविनि’’ के कथनकार ‘दुर्वासा’ हैं। यह उक्ति अभिज्ञान शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क की है। दुर्वासा ऋषि, कण्व आश्रम में पहुँचते हैं, वहाँ दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न शकुन्तला जान नहीं पाती और ऋषि दुर्वासा उसके इस व्यवहार को अतिथि का अपमान समझ बैठते हैं।