Correct Answer:
Option D - सामान्य भवनों की भूकम्प प्रतिरोधक क्षमता निम्न प्रकार से बढ़ती है–
(i) दरवाजें-खिड़कियाँ सममित स्थिति में रखकर।
(ii)कुरसी तल, लिन्टल तल व छत तल पर भूकम्प पट्टियों (Seismic Bonds) डाल कर।
(A) कुरसी पट्टी (Plinth Band)
(B)देहल या सिल पट्टी (Sill Band)
(C) छत पट्टी (Roof Band)
(D) गेबल पट्टी (Gable Band)
(iii) संरचना की दीवारों के संगम में अतिरिक्त प्रबलन डाल कर।
(iv) भवन की निचली मन्जिलों में प्रभावी अपरूपण दीवारों (Shear walls) खड़ी करके।
(v) खिड़कियों/रोशनदानों में बंधनी फ्रेम लगाकर
(vi) भवन के चारों तरफ गहरी खाई खोद कर, उसमें बालू भर देनी चाहिए। इससे भूकम्प के समय उपजे कम्पन्न बालू में अवशोषित हो जाती है।
D. सामान्य भवनों की भूकम्प प्रतिरोधक क्षमता निम्न प्रकार से बढ़ती है–
(i) दरवाजें-खिड़कियाँ सममित स्थिति में रखकर।
(ii)कुरसी तल, लिन्टल तल व छत तल पर भूकम्प पट्टियों (Seismic Bonds) डाल कर।
(A) कुरसी पट्टी (Plinth Band)
(B)देहल या सिल पट्टी (Sill Band)
(C) छत पट्टी (Roof Band)
(D) गेबल पट्टी (Gable Band)
(iii) संरचना की दीवारों के संगम में अतिरिक्त प्रबलन डाल कर।
(iv) भवन की निचली मन्जिलों में प्रभावी अपरूपण दीवारों (Shear walls) खड़ी करके।
(v) खिड़कियों/रोशनदानों में बंधनी फ्रेम लगाकर
(vi) भवन के चारों तरफ गहरी खाई खोद कर, उसमें बालू भर देनी चाहिए। इससे भूकम्प के समय उपजे कम्पन्न बालू में अवशोषित हो जाती है।