Q: (70-75): निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकलप को चुनिए। पंखों से रे, फैले फैले ताड़ों के दल, लंबी-लंबी अँगुलियाँ हैं चौड़े करतल। तड़-तड़ पड़ती धार वारि की उन पर चंचल, टप-टप झरतीं कर मुख से जल बूँदें झलमल। नाच रहे पागल हो ताली दे दे चल-दल, झूम-झूम सिर नीम हिलातीं सुख से विह्वल। हरसिंगार झरते, बेला कलि बढ़ती पल पल, हँसमुख हरियाली में खग कुल गाते मंगल? ‘खग कुल गाते मंगल’ से ताप्तर्य है-
A.
पक्षी मंगलाचरण कर रहे हैं।
B.
पक्षी कुल का गीत गा रहे हैं।
C.
पक्षी हर्ष के गीत का रहे हैं।
D.
पक्षी कुल की मंगल कामना कर रहे हैं।
Correct Answer:
Option C - उपर्युक्त काव्यांश में ‘खग’ कुल गाते मंगल से तात्पर्य है–पक्षी हर्ष के गीत गा रहे हैं। हरियाली पा कर पक्षी आदि खुशी से चहक रहें हैं।
C. उपर्युक्त काव्यांश में ‘खग’ कुल गाते मंगल से तात्पर्य है–पक्षी हर्ष के गीत गा रहे हैं। हरियाली पा कर पक्षी आदि खुशी से चहक रहें हैं।
Explanations:
उपर्युक्त काव्यांश में ‘खग’ कुल गाते मंगल से तात्पर्य है–पक्षी हर्ष के गीत गा रहे हैं। हरियाली पा कर पक्षी आदि खुशी से चहक रहें हैं।
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