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Q: ‘‘लङ्कात: प्रतिष्ठमानस्य भगवतो रामचन्द्रस्येयमुक्ति:’’ इत्यत्र ‘भगवत:’ अस्मिन्पदे का विभक्ति:?
  • A. प्रथमा
  • B. षष्ठी
  • C. द्वितीया
  • D. पञ्चमी
Correct Answer: Option B - ‘‘लङ्कात: प्रतिष्ठमानस्य भगवतो रामचन्द्रस्येयमुक्ति:’’ वाक्ये भगवत: पदे षष्ठीविभक्ति एकवचन: अस्ति अर्थात् – लङ्का से चलते हुए भगवान रामचन्द्र की यह उक्ति है ‘‘इस वाक्य में प्रयुक्त’’ भगवत:’’ पद में षष्ठी विभक्ति एक वचन है। लङ्कात: लंका+ तसिल् ‘‘पञ्चम्यास्तसिल’’ = लङ्कात: से तसिल् प्रत्यय होता है। प्रतिष्ठमानस्य = प्र+ (स्था) तिष्ठा + शानच् +a ष० वि० एकवचन रामचन्द्रस्य = षष्ठी विभक्ति एकवचन,
B. ‘‘लङ्कात: प्रतिष्ठमानस्य भगवतो रामचन्द्रस्येयमुक्ति:’’ वाक्ये भगवत: पदे षष्ठीविभक्ति एकवचन: अस्ति अर्थात् – लङ्का से चलते हुए भगवान रामचन्द्र की यह उक्ति है ‘‘इस वाक्य में प्रयुक्त’’ भगवत:’’ पद में षष्ठी विभक्ति एक वचन है। लङ्कात: लंका+ तसिल् ‘‘पञ्चम्यास्तसिल’’ = लङ्कात: से तसिल् प्रत्यय होता है। प्रतिष्ठमानस्य = प्र+ (स्था) तिष्ठा + शानच् +a ष० वि० एकवचन रामचन्द्रस्य = षष्ठी विभक्ति एकवचन,

Explanations:

‘‘लङ्कात: प्रतिष्ठमानस्य भगवतो रामचन्द्रस्येयमुक्ति:’’ वाक्ये भगवत: पदे षष्ठीविभक्ति एकवचन: अस्ति अर्थात् – लङ्का से चलते हुए भगवान रामचन्द्र की यह उक्ति है ‘‘इस वाक्य में प्रयुक्त’’ भगवत:’’ पद में षष्ठी विभक्ति एक वचन है। लङ्कात: लंका+ तसिल् ‘‘पञ्चम्यास्तसिल’’ = लङ्कात: से तसिल् प्रत्यय होता है। प्रतिष्ठमानस्य = प्र+ (स्था) तिष्ठा + शानच् +a ष० वि० एकवचन रामचन्द्रस्य = षष्ठी विभक्ति एकवचन,