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Q: 1873 में रचित पुस्तक गुलामगिरी किस धारणा को निष्प्रभावी करती है?
  • A. निम्नजातीय विभेद
  • B. धार्मिक असमानता
  • C. सामाजिक ताने-बाने की जटिलता
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - ज्योतिबा राव फुले द्वारा लिखित पुस्तक ‘गुलामगिरी (1873)’ निम्नलिखित धारणाओं को निष्प्रभावी करती है– 1. निम्नजातीय विभेद 2. ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का विरोध 3. सामाजिक ताने-बने की जटिलता गुलामगिरी (गुलामी) पुस्तक को फुले ने उन सभी अमेरिकियों को समर्पित कर दिया जिन्होंने गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्ष किया था इस प्रकार उन्होंने भारत की निम्न जातियों और अमेरिका के काले गुलामों की दुर्दशा को एक-दूसरे से जोड़ दिया।
D. ज्योतिबा राव फुले द्वारा लिखित पुस्तक ‘गुलामगिरी (1873)’ निम्नलिखित धारणाओं को निष्प्रभावी करती है– 1. निम्नजातीय विभेद 2. ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का विरोध 3. सामाजिक ताने-बने की जटिलता गुलामगिरी (गुलामी) पुस्तक को फुले ने उन सभी अमेरिकियों को समर्पित कर दिया जिन्होंने गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्ष किया था इस प्रकार उन्होंने भारत की निम्न जातियों और अमेरिका के काले गुलामों की दुर्दशा को एक-दूसरे से जोड़ दिया।

Explanations:

ज्योतिबा राव फुले द्वारा लिखित पुस्तक ‘गुलामगिरी (1873)’ निम्नलिखित धारणाओं को निष्प्रभावी करती है– 1. निम्नजातीय विभेद 2. ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का विरोध 3. सामाजिक ताने-बने की जटिलता गुलामगिरी (गुलामी) पुस्तक को फुले ने उन सभी अमेरिकियों को समर्पित कर दिया जिन्होंने गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्ष किया था इस प्रकार उन्होंने भारत की निम्न जातियों और अमेरिका के काले गुलामों की दुर्दशा को एक-दूसरे से जोड़ दिया।