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  • A. आयतन के संरक्षण की समझ द्रव्यमान के संरक्षण से पहले आती है।
  • B. भार के संरक्षण की समझ संख्याओं के संरक्षण से पहले आती है।
  • C. लम्बाई के संरक्षण की समझ संख्याओं के संरक्षण से पहले आती है।
  • D. भार के संरक्षण की समझ आयतन के संरक्षण से पहले आती है।
Correct Answer: Option D - पियाजे के प्रस्ताव के अनुसार ‘‘माप’’ में विभिन्न भौतिक राशियों के संरक्षण की योग्यता के विषय में सही कथन - भार के संरक्षण की समझ आयतन के संरक्षण से पहले आती है। पियाजे द्वारा प्रतिपादित संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत या विकासात्मक सिद्धांत मानव बुद्धि की प्रकृति एवं उसके विकास से सम्बन्धित एक विशद सिद्धांत है। पियाजे का सिद्धांत, विकासी अवस्था सिद्धांत भी कहलाता है। यह सिद्धांत ज्ञान की प्रकृति के बारे में बताता है, जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया है– 1. संवेदिक पेशीय अवस्था (Sensory motor) : जन्म से 2 वर्ष 2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational) : 2-7 वर्ष 3. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete operational) : 7-11 वर्ष 4. अमूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Formal operational) : 11-18 वर्ष
D. पियाजे के प्रस्ताव के अनुसार ‘‘माप’’ में विभिन्न भौतिक राशियों के संरक्षण की योग्यता के विषय में सही कथन - भार के संरक्षण की समझ आयतन के संरक्षण से पहले आती है। पियाजे द्वारा प्रतिपादित संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत या विकासात्मक सिद्धांत मानव बुद्धि की प्रकृति एवं उसके विकास से सम्बन्धित एक विशद सिद्धांत है। पियाजे का सिद्धांत, विकासी अवस्था सिद्धांत भी कहलाता है। यह सिद्धांत ज्ञान की प्रकृति के बारे में बताता है, जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया है– 1. संवेदिक पेशीय अवस्था (Sensory motor) : जन्म से 2 वर्ष 2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational) : 2-7 वर्ष 3. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete operational) : 7-11 वर्ष 4. अमूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Formal operational) : 11-18 वर्ष

Explanations:

पियाजे के प्रस्ताव के अनुसार ‘‘माप’’ में विभिन्न भौतिक राशियों के संरक्षण की योग्यता के विषय में सही कथन - भार के संरक्षण की समझ आयतन के संरक्षण से पहले आती है। पियाजे द्वारा प्रतिपादित संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत या विकासात्मक सिद्धांत मानव बुद्धि की प्रकृति एवं उसके विकास से सम्बन्धित एक विशद सिद्धांत है। पियाजे का सिद्धांत, विकासी अवस्था सिद्धांत भी कहलाता है। यह सिद्धांत ज्ञान की प्रकृति के बारे में बताता है, जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया है– 1. संवेदिक पेशीय अवस्था (Sensory motor) : जन्म से 2 वर्ष 2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational) : 2-7 वर्ष 3. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete operational) : 7-11 वर्ष 4. अमूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Formal operational) : 11-18 वर्ष