Explanations:
रचनाकारों एवं रचना का सही सुमेलित युग- रचनाकार - रचना सोमप्रभसूरि - कुमारपाल प्रतिबोध नरपति नाल्ह - बीसलदेव रासो भट्टकेदार - जयचंद प्रकाश ⇒ जैनाचार्य मेरुतुंग प्रसिद्ध जैन आचार्य थे। इन्होंने ‘प्रबन्ध चिन्तामणि’ (1304) संस्कृत में लिखा। इसमें अनेक ऐतिहासिक कथा प्रबन्ध है। इसमें अपभ्रंश के जो दोहे उद्धृत हैं वे दूसरों के बनाये हुए हैं। इनमें मुंज के दोहों का साहित्यिक महत्व सबसे अधिक है। ⇒ श्रीधर ने 14वीं शताब्दी में ‘रणमल्ल छंद’ नाम का वीरगीत लिखा। जिसमें ईडर के राठौर राजा रणमल्ल की पाटन के सूबेदार ज़फर खाँ पर प्राप्त विजय का वर्णन है। ⇒ ‘कुमारपालप्रतिबोध’ जैनाचार्य सोमप्रभ सूरी का 1184 ई. में गद्य पद्यमय संस्कृत-प्राकृत काव्य है। बीच-बीच में अपभ्रंश के दोहे आए है। ⇒ ‘बीसलदेव रासो’ नरपति नाल्ह द्वारा 12वीं सदी में लिखा एक वीरगीत है। यह एक विरहपरक संदेश काव्य है जिसमें अजमेर के राजा चौहान बीसलदेव तथा राजा भोज की पुत्री राजमती के विवाह, वियोग और पुनर्मिलन की कथा है। हिन्दी में सर्वप्रथम बाहरमासा वर्णन इसमें मिलता है। रासो होते हुए भी यह शृंगारी काव्य है। ⇒ ‘जयचंद प्रकाश’ 12वी सदी में भट्ट केदार द्वारा लिखा वीरगीत, महाकाव्य है। किन्तु यह ग्रंथ अप्राप्य है। जिसमें कन्नौज के सम्राट जयचंद के शौर्य और पराक्रम की कथा का वर्णन होना अनुमानित है। नोट:- प्रश्न में रचनाकार एवं रचनाओं का युग्म सुमेलित करने के लिए दिया गया है, जो कि विकल्प के असंगत है। प्रश्न का सही रूप होगा- रचनाकारों एवं रचनाओं के सही युग्म का चयन कीजिए।