Correct Answer:
Option B - ‘मेरी तिब्बत यात्रा’ के संबंध में सत्य कथन हैं–
1. भारत के नालंदा के नाम पर जहाँ लंका में एक नालंदा, वहाँ तिब्बत भी उससे वंचित नहीं है।
2. तिब्बत में सुरक्षित भारतीय ग्रंथों की सूची बिहार-उड़ीसा रिसर्च सोसायटी जर्नल के भाग 21वें में छपी है।
3. भोटिया लोग छुपे (चोगा) के दामन से खाने-पीने की चीजों के छू जाने से बहुत परहेज करते हैं।
‘मेरी तिब्बत यात्रा’ (1937 ई.) यात्रावृतांत के लेखक राहुल सांकृत्यायन हैं। राहुल सांकृत्यायन साधु, बौद्ध भिक्षु, यायावर, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, नाटककार और कथाकार थे। इनके प्रमुख यात्रावृतांत हैं– मेरी जीवन यात्रा, मेरी लद्दाख यात्रा, किन्नर प्रदेश में, रूस में पच्चीस मास, यूरोप यात्रा आदि।
B. ‘मेरी तिब्बत यात्रा’ के संबंध में सत्य कथन हैं–
1. भारत के नालंदा के नाम पर जहाँ लंका में एक नालंदा, वहाँ तिब्बत भी उससे वंचित नहीं है।
2. तिब्बत में सुरक्षित भारतीय ग्रंथों की सूची बिहार-उड़ीसा रिसर्च सोसायटी जर्नल के भाग 21वें में छपी है।
3. भोटिया लोग छुपे (चोगा) के दामन से खाने-पीने की चीजों के छू जाने से बहुत परहेज करते हैं।
‘मेरी तिब्बत यात्रा’ (1937 ई.) यात्रावृतांत के लेखक राहुल सांकृत्यायन हैं। राहुल सांकृत्यायन साधु, बौद्ध भिक्षु, यायावर, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, नाटककार और कथाकार थे। इनके प्रमुख यात्रावृतांत हैं– मेरी जीवन यात्रा, मेरी लद्दाख यात्रा, किन्नर प्रदेश में, रूस में पच्चीस मास, यूरोप यात्रा आदि।