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Q: .
  • A. माधुरी
  • B. कल्पना
  • C. चाँद
  • D. प्रभा
Correct Answer: Option B - ‘अंधेरे में’ कविता का 1964 में ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से प्रकाशन ‘कल्पना’ पत्रिका में हुआ। ⇒ ‘अंधेरे में’ कविता मुक्ति बोध द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ में संकलित है। ‘अंधेरे में’ मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। जिसमें मुक्तिबोध की रचनात्मकता का उत्कर्ष ‘अंधेरे में’ देखा जा सकता है। यह कविता फैंटेसी शैली में लिखी गई है। इस कविता का रचनाकाल 1857 से 1964 ईं के बीच का रहा है। ⇒ श्रीकांत वर्मा ने ‘अंधेरे में’ कविता को ‘कविता का हिन्दूस्तान’ कहते है। ⇒ नामवर सिंह इस कविता को ‘अस्मिता की खोज’ बताते है। ⇒ निर्मला जैन ‘अंधेरे में’ कविता को ‘अंत:स्थल का विप्लव’ कहा है।
B. ‘अंधेरे में’ कविता का 1964 में ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से प्रकाशन ‘कल्पना’ पत्रिका में हुआ। ⇒ ‘अंधेरे में’ कविता मुक्ति बोध द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ में संकलित है। ‘अंधेरे में’ मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। जिसमें मुक्तिबोध की रचनात्मकता का उत्कर्ष ‘अंधेरे में’ देखा जा सकता है। यह कविता फैंटेसी शैली में लिखी गई है। इस कविता का रचनाकाल 1857 से 1964 ईं के बीच का रहा है। ⇒ श्रीकांत वर्मा ने ‘अंधेरे में’ कविता को ‘कविता का हिन्दूस्तान’ कहते है। ⇒ नामवर सिंह इस कविता को ‘अस्मिता की खोज’ बताते है। ⇒ निर्मला जैन ‘अंधेरे में’ कविता को ‘अंत:स्थल का विप्लव’ कहा है।

Explanations:

‘अंधेरे में’ कविता का 1964 में ‘आशंका के द्वीप अंधेरे में’ नाम से प्रकाशन ‘कल्पना’ पत्रिका में हुआ। ⇒ ‘अंधेरे में’ कविता मुक्ति बोध द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ में संकलित है। ‘अंधेरे में’ मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। जिसमें मुक्तिबोध की रचनात्मकता का उत्कर्ष ‘अंधेरे में’ देखा जा सकता है। यह कविता फैंटेसी शैली में लिखी गई है। इस कविता का रचनाकाल 1857 से 1964 ईं के बीच का रहा है। ⇒ श्रीकांत वर्मा ने ‘अंधेरे में’ कविता को ‘कविता का हिन्दूस्तान’ कहते है। ⇒ नामवर सिंह इस कविता को ‘अस्मिता की खोज’ बताते है। ⇒ निर्मला जैन ‘अंधेरे में’ कविता को ‘अंत:स्थल का विप्लव’ कहा है।