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Q: .
  • A. केवल A, B और D
  • B. केवलB, D और E
  • C. केवल B, C और D
  • D. केवल A, C और D
Correct Answer: Option D - ‘सिंदूर की होली’ नाटक में मनोरमा के कथन निम्नलिखित हैं – 1. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूँगी। 2. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है। कला का आधार तो है विश्वास और शिक्षा का संदेह। 3. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष। • पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र कृत ‘सिंदूर की होली’ नाटक का प्रकाशन वर्ष 1934 ई. है। यह समस्या प्रधान नाटक है। • लक्ष्मी नारायण मिश्र को समस्या प्रधान नाटक का जनक कहा जाता है। • इस नाटक के तीन अंक हैं। तीनों अंकों में दृश्य स्थल एक ही है। डिप्टी कलेक्टर मुरारीलाल के बंगले की बैठक। नाटक के पुरुष पात्र – रजनीकांत, मनोजशंकर, मुरारीलाल, माहिर अली, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह, डॉक्टर। स्त्री पात्र – चंद्रकला, मनोरमा। इनके प्रमुख नाटक – अशोक (1927 ई.), संन्यासी (1930 ई.), राक्षस का माqन्दर (1931 ई.), मुक्ति का रहस्य (1932 ई.), राजयोग (1933 ई.), आधी रात (1936 ई.), गरुड़ ध्वज (1945 ई.), गंगाद्वार (1974 ई.) नारद की वीणा (1946 ई.) चक्रव्यूह (1954 ई.) आदि।
D. ‘सिंदूर की होली’ नाटक में मनोरमा के कथन निम्नलिखित हैं – 1. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूँगी। 2. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है। कला का आधार तो है विश्वास और शिक्षा का संदेह। 3. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष। • पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र कृत ‘सिंदूर की होली’ नाटक का प्रकाशन वर्ष 1934 ई. है। यह समस्या प्रधान नाटक है। • लक्ष्मी नारायण मिश्र को समस्या प्रधान नाटक का जनक कहा जाता है। • इस नाटक के तीन अंक हैं। तीनों अंकों में दृश्य स्थल एक ही है। डिप्टी कलेक्टर मुरारीलाल के बंगले की बैठक। नाटक के पुरुष पात्र – रजनीकांत, मनोजशंकर, मुरारीलाल, माहिर अली, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह, डॉक्टर। स्त्री पात्र – चंद्रकला, मनोरमा। इनके प्रमुख नाटक – अशोक (1927 ई.), संन्यासी (1930 ई.), राक्षस का माqन्दर (1931 ई.), मुक्ति का रहस्य (1932 ई.), राजयोग (1933 ई.), आधी रात (1936 ई.), गरुड़ ध्वज (1945 ई.), गंगाद्वार (1974 ई.) नारद की वीणा (1946 ई.) चक्रव्यूह (1954 ई.) आदि।

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‘सिंदूर की होली’ नाटक में मनोरमा के कथन निम्नलिखित हैं – 1. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूँगी। 2. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है। कला का आधार तो है विश्वास और शिक्षा का संदेह। 3. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष। • पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र कृत ‘सिंदूर की होली’ नाटक का प्रकाशन वर्ष 1934 ई. है। यह समस्या प्रधान नाटक है। • लक्ष्मी नारायण मिश्र को समस्या प्रधान नाटक का जनक कहा जाता है। • इस नाटक के तीन अंक हैं। तीनों अंकों में दृश्य स्थल एक ही है। डिप्टी कलेक्टर मुरारीलाल के बंगले की बैठक। नाटक के पुरुष पात्र – रजनीकांत, मनोजशंकर, मुरारीलाल, माहिर अली, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह, डॉक्टर। स्त्री पात्र – चंद्रकला, मनोरमा। इनके प्रमुख नाटक – अशोक (1927 ई.), संन्यासी (1930 ई.), राक्षस का माqन्दर (1931 ई.), मुक्ति का रहस्य (1932 ई.), राजयोग (1933 ई.), आधी रात (1936 ई.), गरुड़ ध्वज (1945 ई.), गंगाद्वार (1974 ई.) नारद की वीणा (1946 ई.) चक्रव्यूह (1954 ई.) आदि।