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Q: .
  • A. दिल्ली दरबार दर्पण
  • B. नाखून क्यों बढ़ते हैं
  • C. शिवमूर्ति
  • D. मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
Correct Answer: Option A - उपरोक्त कथन ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ निबन्ध से है। ⇒ ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ 1877 में प्रकाशित भारतेन्दु हरिश्चन्द का इतिहास सम्बन्धी निबन्ध है। ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ में कंपनी के शासन का अंत तथा महारानी विक्टोरिया के शासन के आरम्भ की उद्घोषणा के लिए लार्ड लिटिन ने दिल्ली में बड़े दरबार का आयोजन किया जिसमें देशी नवाब, महाराजा, जागीदार आदि के शामिल होने का चित्रण है। ⇒ मेरे राम का मुकुट भींग रहा है (1974) निबन्ध विद्यानिवास मिश्र का है।
A. उपरोक्त कथन ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ निबन्ध से है। ⇒ ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ 1877 में प्रकाशित भारतेन्दु हरिश्चन्द का इतिहास सम्बन्धी निबन्ध है। ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ में कंपनी के शासन का अंत तथा महारानी विक्टोरिया के शासन के आरम्भ की उद्घोषणा के लिए लार्ड लिटिन ने दिल्ली में बड़े दरबार का आयोजन किया जिसमें देशी नवाब, महाराजा, जागीदार आदि के शामिल होने का चित्रण है। ⇒ मेरे राम का मुकुट भींग रहा है (1974) निबन्ध विद्यानिवास मिश्र का है।

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उपरोक्त कथन ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ निबन्ध से है। ⇒ ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ 1877 में प्रकाशित भारतेन्दु हरिश्चन्द का इतिहास सम्बन्धी निबन्ध है। ‘दिल्ली दरबार दर्पण’ में कंपनी के शासन का अंत तथा महारानी विक्टोरिया के शासन के आरम्भ की उद्घोषणा के लिए लार्ड लिटिन ने दिल्ली में बड़े दरबार का आयोजन किया जिसमें देशी नवाब, महाराजा, जागीदार आदि के शामिल होने का चित्रण है। ⇒ मेरे राम का मुकुट भींग रहा है (1974) निबन्ध विद्यानिवास मिश्र का है।