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Q: .
  • A. इसकी भूमिका जवाहरलाल नेहरू ने लिखी है।
  • B. तीसरे अध्याय का शीर्षक ‘भारतीय संस्कृति और यूरोप’’ है।
  • C. पुस्तक का समर्पण डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के नाम है।
  • D. पहला संस्करण 1956 में प्रकाशित हुआ।
Correct Answer: Option B - ‘‘तीसरे अध्याय का शीर्षक ‘भारतीय संस्कृति और यूरोप’ है।’’ रामधारी सिंह दिनकर की पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के संदर्भ में असत्य तथ्य है। शेष तथ्य दिये गये पुस्तक के संदर्भ में सही हैं। ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है, जो इस प्रकार है- 1. भारतीय जनता की रचना और हिन्दू-संस्कृति का आविर्भाव 2. प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोह 3. हिन्दू संस्कृति और इस्लाम 4. भारतीय संस्कृति और यूरोप इस पुस्तक में दिनकर जी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर और मुहम्मद इकबाल को नवोत्थान के कवि के रूप में आख्यायित किया है। रामधारी सिंह दिनकर को अपनी इस कृति के लिए 1959 ई. में हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
B. ‘‘तीसरे अध्याय का शीर्षक ‘भारतीय संस्कृति और यूरोप’ है।’’ रामधारी सिंह दिनकर की पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के संदर्भ में असत्य तथ्य है। शेष तथ्य दिये गये पुस्तक के संदर्भ में सही हैं। ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है, जो इस प्रकार है- 1. भारतीय जनता की रचना और हिन्दू-संस्कृति का आविर्भाव 2. प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोह 3. हिन्दू संस्कृति और इस्लाम 4. भारतीय संस्कृति और यूरोप इस पुस्तक में दिनकर जी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर और मुहम्मद इकबाल को नवोत्थान के कवि के रूप में आख्यायित किया है। रामधारी सिंह दिनकर को अपनी इस कृति के लिए 1959 ई. में हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

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‘‘तीसरे अध्याय का शीर्षक ‘भारतीय संस्कृति और यूरोप’ है।’’ रामधारी सिंह दिनकर की पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के संदर्भ में असत्य तथ्य है। शेष तथ्य दिये गये पुस्तक के संदर्भ में सही हैं। ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है, जो इस प्रकार है- 1. भारतीय जनता की रचना और हिन्दू-संस्कृति का आविर्भाव 2. प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोह 3. हिन्दू संस्कृति और इस्लाम 4. भारतीय संस्कृति और यूरोप इस पुस्तक में दिनकर जी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर और मुहम्मद इकबाल को नवोत्थान के कवि के रूप में आख्यायित किया है। रामधारी सिंह दिनकर को अपनी इस कृति के लिए 1959 ई. में हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।