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Q: .
  • A. हिंदी
  • B. उर्दू
  • C. फारसी
  • D. तुर्की
Correct Answer: Option C - ‘दवा’ फारसी भाषा का शब्द है। ध्यातव्य है कि हिन्दी में विदेशी भाषाओं के बहुत से शब्द प्रचलित हैं, ऐसे शब्दों को आगत शब्द की श्रेणी में रखते हैं। उद्भव या स्रोत की दृष्टि से हिन्दी में प्रचलित शब्दों को मूलत: पाँच भागों में बाँटा जाता है जो निम्न हैं– 1. तत्सम 2. तद्भव 3. देशज 4. विदेशज/आगत 5. संकर। हिन्दी में प्रचलित फारसी एवं तुर्की भाषा के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द निम्न प्रकार हैं– फारसी– आराम, आफत, आवाज, आईना, कबूतर, कुश्ती, किशमिश, खामोश, खरगोश, चश्मा, जहर, जिंदगी, तमाशा, देहात, दुकान आदि। तुर्की–उर्दू, कालीन, कैंची, कुली, कुर्की, चेचक, चमचा, तोप, तलाश, बेगम, बहादुर, लफंगा, लाश, सुराग, सौगात आदि।
C. ‘दवा’ फारसी भाषा का शब्द है। ध्यातव्य है कि हिन्दी में विदेशी भाषाओं के बहुत से शब्द प्रचलित हैं, ऐसे शब्दों को आगत शब्द की श्रेणी में रखते हैं। उद्भव या स्रोत की दृष्टि से हिन्दी में प्रचलित शब्दों को मूलत: पाँच भागों में बाँटा जाता है जो निम्न हैं– 1. तत्सम 2. तद्भव 3. देशज 4. विदेशज/आगत 5. संकर। हिन्दी में प्रचलित फारसी एवं तुर्की भाषा के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द निम्न प्रकार हैं– फारसी– आराम, आफत, आवाज, आईना, कबूतर, कुश्ती, किशमिश, खामोश, खरगोश, चश्मा, जहर, जिंदगी, तमाशा, देहात, दुकान आदि। तुर्की–उर्दू, कालीन, कैंची, कुली, कुर्की, चेचक, चमचा, तोप, तलाश, बेगम, बहादुर, लफंगा, लाश, सुराग, सौगात आदि।

Explanations:

‘दवा’ फारसी भाषा का शब्द है। ध्यातव्य है कि हिन्दी में विदेशी भाषाओं के बहुत से शब्द प्रचलित हैं, ऐसे शब्दों को आगत शब्द की श्रेणी में रखते हैं। उद्भव या स्रोत की दृष्टि से हिन्दी में प्रचलित शब्दों को मूलत: पाँच भागों में बाँटा जाता है जो निम्न हैं– 1. तत्सम 2. तद्भव 3. देशज 4. विदेशज/आगत 5. संकर। हिन्दी में प्रचलित फारसी एवं तुर्की भाषा के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द निम्न प्रकार हैं– फारसी– आराम, आफत, आवाज, आईना, कबूतर, कुश्ती, किशमिश, खामोश, खरगोश, चश्मा, जहर, जिंदगी, तमाशा, देहात, दुकान आदि। तुर्की–उर्दू, कालीन, कैंची, कुली, कुर्की, चेचक, चमचा, तोप, तलाश, बेगम, बहादुर, लफंगा, लाश, सुराग, सौगात आदि।