Correct Answer:
Option A - प्रेमचंद कृत गोदान उपन्यास से संबंधित घटनाएं-
1. मैं तो सोनारी वालों से कह दूँगी, अगर तुमने एक पैसा भी दहेज में लिया, तो मैं तुमसे ब्याह न करूँगी।
2. कैसी चाकरी और किसकी चाकरी? यहाँ तो कोई किसी का चाकर नहीं। सभी बराबर हैं।
3. लजाते क्यों हो, गोद में लेलो, प्यार करो, कैसा काठ का कलेजा है तुम्हारा?
• गोदान (1936 ई.) प्रेमचन्द का अन्तिम पूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास है। गोदान ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य है। इसमें प्रगतिवाद, गाँधीवाद और मार्क्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है।
• गोदान उपन्यास के प्रमुख पात्र - होरी, धनिया, गोबर, झुनिया, रायसाहब, मेहता, मालती, भोला, सोना, रूपा, खन्ना, गोविंदी, हीरा, सिलिया, मातादीन, दातादीन, ओंकार नाथ, सोभा, नोहरी आदि।
A. प्रेमचंद कृत गोदान उपन्यास से संबंधित घटनाएं-
1. मैं तो सोनारी वालों से कह दूँगी, अगर तुमने एक पैसा भी दहेज में लिया, तो मैं तुमसे ब्याह न करूँगी।
2. कैसी चाकरी और किसकी चाकरी? यहाँ तो कोई किसी का चाकर नहीं। सभी बराबर हैं।
3. लजाते क्यों हो, गोद में लेलो, प्यार करो, कैसा काठ का कलेजा है तुम्हारा?
• गोदान (1936 ई.) प्रेमचन्द का अन्तिम पूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास है। गोदान ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य है। इसमें प्रगतिवाद, गाँधीवाद और मार्क्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है।
• गोदान उपन्यास के प्रमुख पात्र - होरी, धनिया, गोबर, झुनिया, रायसाहब, मेहता, मालती, भोला, सोना, रूपा, खन्ना, गोविंदी, हीरा, सिलिया, मातादीन, दातादीन, ओंकार नाथ, सोभा, नोहरी आदि।