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Q: रेशम के तंतुओं पर निम्न में से किसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है?
  • A. अम्ल का
  • B. क्षार का
  • C. अम्ल तथा क्षार दोनों का
  • D. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - रेशम के तंतुओं पर क्षार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। क्षार दाग धब्बे छुड़ाने हेतु प्रयोग में लाया जाता है। रेशम रंगों के प्रति सादृश्यता होता है। इसके लिये अम्लीय रंगों का (एसिड डाई) का प्रयोग किया जाता है। रेशम पर रंग आसानी से चढ़ता है। तथा पक्का होता है। विरंजक हेतु हाईड्रोजन पराक्साइड का प्रयोग किया जाता है। परन्तु तीव्र विरंजक जैसे क्लोरीन, सोडियम हाइपोक्लोराइड आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। रेशम पर पसीने का प्रभाव बुरा पड़ता है। रेशम पसीने वाले स्थान पर कमजोर एवं बदरंग हो जाते हैं।
B. रेशम के तंतुओं पर क्षार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। क्षार दाग धब्बे छुड़ाने हेतु प्रयोग में लाया जाता है। रेशम रंगों के प्रति सादृश्यता होता है। इसके लिये अम्लीय रंगों का (एसिड डाई) का प्रयोग किया जाता है। रेशम पर रंग आसानी से चढ़ता है। तथा पक्का होता है। विरंजक हेतु हाईड्रोजन पराक्साइड का प्रयोग किया जाता है। परन्तु तीव्र विरंजक जैसे क्लोरीन, सोडियम हाइपोक्लोराइड आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। रेशम पर पसीने का प्रभाव बुरा पड़ता है। रेशम पसीने वाले स्थान पर कमजोर एवं बदरंग हो जाते हैं।

Explanations:

रेशम के तंतुओं पर क्षार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। क्षार दाग धब्बे छुड़ाने हेतु प्रयोग में लाया जाता है। रेशम रंगों के प्रति सादृश्यता होता है। इसके लिये अम्लीय रंगों का (एसिड डाई) का प्रयोग किया जाता है। रेशम पर रंग आसानी से चढ़ता है। तथा पक्का होता है। विरंजक हेतु हाईड्रोजन पराक्साइड का प्रयोग किया जाता है। परन्तु तीव्र विरंजक जैसे क्लोरीन, सोडियम हाइपोक्लोराइड आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। रेशम पर पसीने का प्रभाव बुरा पड़ता है। रेशम पसीने वाले स्थान पर कमजोर एवं बदरंग हो जाते हैं।