Correct Answer:
Option D - लेखक की मृत्यु की घोषणा ‘रोलां बार्थ’ ने दी थी। इन्होंने 1967 ई. में "La Mort De L'auteur" नामक एक निबंध में यह विचार प्रस्तुत किया। इस विचार में बार्थ ने पारंपरिक साहित्यिक आलोचना के इस विचार को चुनौती दी कि किसी पाठ का अर्थ लेखक के इरादे या जीवन पर निर्भर करता है। उनका तर्क था कि पाठ का अर्थ वास्तव मे पाठक की व्याख्या पर निर्भर करता है। और लेखक की मृत्यु हो चुकी है क्योंकि वह अब पाठ के अर्थ को नियंत्रित नहीं करता है।
⦁ यह सिद्धांत उत्तर-संरचनावाद और उत्तर-आधुनिकतावाद के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, और इसका साहित्य, आलोचना और सांस्कृतिक अध्ययन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
D. लेखक की मृत्यु की घोषणा ‘रोलां बार्थ’ ने दी थी। इन्होंने 1967 ई. में "La Mort De L'auteur" नामक एक निबंध में यह विचार प्रस्तुत किया। इस विचार में बार्थ ने पारंपरिक साहित्यिक आलोचना के इस विचार को चुनौती दी कि किसी पाठ का अर्थ लेखक के इरादे या जीवन पर निर्भर करता है। उनका तर्क था कि पाठ का अर्थ वास्तव मे पाठक की व्याख्या पर निर्भर करता है। और लेखक की मृत्यु हो चुकी है क्योंकि वह अब पाठ के अर्थ को नियंत्रित नहीं करता है।
⦁ यह सिद्धांत उत्तर-संरचनावाद और उत्तर-आधुनिकतावाद के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, और इसका साहित्य, आलोचना और सांस्कृतिक अध्ययन पर गहरा प्रभाव पड़ा।