Correct Answer:
Option A - देवनागरी लिपि सुधार के संबंध में घटित घटनाओं का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है-
1. सर्वप्रथम बालगंगाधर तिलक ने सन् 1904 ई. में अपने पत्र केसरी के लिए 1926 टाइपों की छटाई करके 190 टाइपों का एक फाँट (जिसे तिलक फाँट भी कहते हैं) बनाकर देवनागरी लिपि सुधार का आरम्भ किया।
2. हिंदी साहित्य सम्मेलन के इन्दौर के 24वें अधिवेशन में सन् 1935 ई. में महात्मा गाँधी के सभापतित्व में नागरी लिपि सुधार समिति का गठन किया गया ।
3. नागरी प्रचारिणी सभा ने सन् 1945 ई. में नागरी लिपि सुधार हेतु एक समिति का गठन किया।
4. उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई, 1947ई. में आचार्य नरेद्र देव की अध्यक्षता में नागरी लिपि सुधार समिति का निर्माण किया।
5. उत्तर प्रदेश सरकार ने 28-29 नवम्बर सन् 1953ई. में नागरी लिपि सुधार सम्बन्धी सुझावों पर विचार करने के लिए लखनऊ में लिपि सुधार-परिषद का गठन किया और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और विद्वानों को परिषद में आमंत्रित किया।
6. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित लिपि सुधार परिषद के बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने की थी।
A. देवनागरी लिपि सुधार के संबंध में घटित घटनाओं का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है-
1. सर्वप्रथम बालगंगाधर तिलक ने सन् 1904 ई. में अपने पत्र केसरी के लिए 1926 टाइपों की छटाई करके 190 टाइपों का एक फाँट (जिसे तिलक फाँट भी कहते हैं) बनाकर देवनागरी लिपि सुधार का आरम्भ किया।
2. हिंदी साहित्य सम्मेलन के इन्दौर के 24वें अधिवेशन में सन् 1935 ई. में महात्मा गाँधी के सभापतित्व में नागरी लिपि सुधार समिति का गठन किया गया ।
3. नागरी प्रचारिणी सभा ने सन् 1945 ई. में नागरी लिपि सुधार हेतु एक समिति का गठन किया।
4. उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई, 1947ई. में आचार्य नरेद्र देव की अध्यक्षता में नागरी लिपि सुधार समिति का निर्माण किया।
5. उत्तर प्रदेश सरकार ने 28-29 नवम्बर सन् 1953ई. में नागरी लिपि सुधार सम्बन्धी सुझावों पर विचार करने के लिए लखनऊ में लिपि सुधार-परिषद का गठन किया और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और विद्वानों को परिषद में आमंत्रित किया।
6. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित लिपि सुधार परिषद के बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने की थी।