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Q: .
  • A. बोधा
  • B. घनानंद
  • C. आलम
  • D. ठाकुर
Correct Answer: Option B - ‘कृपाकंद’ के रचयिता ‘घनानंद’ हैं। घनानंद रीतिमुक्त धारा के प्रमुख कवि हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने घनानंद के विषय में लिखा है- ‘‘ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तम्भों में हैं।’’ घनानंद - सुजान सार, इश्कलता, विरहलीला, वियोगबेलि, कोकसार, रसकेलिवल्ली, यमुनायश। बोधा - विरहवारीश, इश्कनामा। आलम - आलमकेलि, माधवानलकामवंâदला, सुदामा चरित, स्याम सनेही। ठाकुर - ठाकुर ठसक, ठाकुर शतक।
B. ‘कृपाकंद’ के रचयिता ‘घनानंद’ हैं। घनानंद रीतिमुक्त धारा के प्रमुख कवि हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने घनानंद के विषय में लिखा है- ‘‘ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तम्भों में हैं।’’ घनानंद - सुजान सार, इश्कलता, विरहलीला, वियोगबेलि, कोकसार, रसकेलिवल्ली, यमुनायश। बोधा - विरहवारीश, इश्कनामा। आलम - आलमकेलि, माधवानलकामवंâदला, सुदामा चरित, स्याम सनेही। ठाकुर - ठाकुर ठसक, ठाकुर शतक।

Explanations:

‘कृपाकंद’ के रचयिता ‘घनानंद’ हैं। घनानंद रीतिमुक्त धारा के प्रमुख कवि हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने घनानंद के विषय में लिखा है- ‘‘ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तम्भों में हैं।’’ घनानंद - सुजान सार, इश्कलता, विरहलीला, वियोगबेलि, कोकसार, रसकेलिवल्ली, यमुनायश। बोधा - विरहवारीश, इश्कनामा। आलम - आलमकेलि, माधवानलकामवंâदला, सुदामा चरित, स्याम सनेही। ठाकुर - ठाकुर ठसक, ठाकुर शतक।