search
Q: Which meridian defined as a line through a point parallel to the central meridian or y-axis of a rectangular coordinate system?/किस याम्योत्तर को एक आयताकार निर्देशांक प्रणाली के वेंâद्रीय याम्योत्तर या y-अक्ष के समानांतर एक बिंदु से गुजरने वाली रेखा के रूप में परिभाषित किया गया है?
  • A. Grid meridian/ग्रिड याम्योत्तर
  • B. Astronomic meridian /खगोलीय याम्योत्तर
  • C. Magnetic meridian/चुंबकीय याम्योत्तर
  • D. Assumed meridan/कल्पित याम्योत्तर
Correct Answer: Option A - ग्रिड याम्योत्तर (Grid Meridian)- यदि एक याम्योत्तर एक निर्दिष्ट क्षेत्र के लिए केन्द्रीय सत्य याम्योत्तर के समानांतर स्थित है जो एक Plane निर्देशांक प्रणाली द्वारा कवर किया गया है, तो इसे ग्रिड याम्योत्तर कहा जाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian)- किसी बिन्दु पर, एक चुम्बकीय सुई पूर्णत: संतुलित एवं मुक्त अवस्था में तथा स्थानीय आकर्षणों से अप्रभावित, क्षैतिज लटकाये जाने पर जो दिशा बताती है, उस दिशा को चुम्बकीय या याम्योत्तर कहते हैं। चुम्बकीय याम्योत्तर की दिशा, चुम्बकीय बलों की भिन्नता के कारण, समय-समय पर बदलती रहती है।
A. ग्रिड याम्योत्तर (Grid Meridian)- यदि एक याम्योत्तर एक निर्दिष्ट क्षेत्र के लिए केन्द्रीय सत्य याम्योत्तर के समानांतर स्थित है जो एक Plane निर्देशांक प्रणाली द्वारा कवर किया गया है, तो इसे ग्रिड याम्योत्तर कहा जाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian)- किसी बिन्दु पर, एक चुम्बकीय सुई पूर्णत: संतुलित एवं मुक्त अवस्था में तथा स्थानीय आकर्षणों से अप्रभावित, क्षैतिज लटकाये जाने पर जो दिशा बताती है, उस दिशा को चुम्बकीय या याम्योत्तर कहते हैं। चुम्बकीय याम्योत्तर की दिशा, चुम्बकीय बलों की भिन्नता के कारण, समय-समय पर बदलती रहती है।

Explanations:

ग्रिड याम्योत्तर (Grid Meridian)- यदि एक याम्योत्तर एक निर्दिष्ट क्षेत्र के लिए केन्द्रीय सत्य याम्योत्तर के समानांतर स्थित है जो एक Plane निर्देशांक प्रणाली द्वारा कवर किया गया है, तो इसे ग्रिड याम्योत्तर कहा जाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian)- किसी बिन्दु पर, एक चुम्बकीय सुई पूर्णत: संतुलित एवं मुक्त अवस्था में तथा स्थानीय आकर्षणों से अप्रभावित, क्षैतिज लटकाये जाने पर जो दिशा बताती है, उस दिशा को चुम्बकीय या याम्योत्तर कहते हैं। चुम्बकीय याम्योत्तर की दिशा, चुम्बकीय बलों की भिन्नता के कारण, समय-समय पर बदलती रहती है।