Correct Answer:
Option C - ‘मानस का हंस’ आमुख के अनुसार, इस उपन्यास को लिखने से पहले नागर जी ने तुलसीदास द्वारा रचित ‘विनयपत्रिका’ को खास तौर से पढ़ा था। ‘मानस का हंस’ (1972 ई.) तुलसीदास की जीवनी एवं व्यक्तित्व पर आधारित औपन्यासिक कृति है तथा इसके रचनाकार अमृतलाल नागर हैं। इनके उपन्यासों को रामविलास शर्मा ने ‘हिन्दी के गैर मानक रूपों का पिटारा’ कहा है। अमृतलाल नागर द्वारा रचित प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं-महाकाल (1947 ई.), सेठ बाँकेलाल (1955 ई.), बूँद और समुद्र (1956 ई.), शतरंज के मोहरे (1959 ई.), सुहाग के नूपुर (1960 ई.), अमृत और विष (1966 ई.), सात घूँघट वाला मुखड़ा (1968 ई.), एकदा नैमिषारण्ये (1972 ई.), नाच्यौं बहुत गोपाल (1978 ई.), खंजन नयन (1981 ई.), बिखरे तिनके (1982 ई.), अग्निगर्भा (1983 ई.), करवट (1985 ई.), पीढि़याँ (1990 ई.)।
C. ‘मानस का हंस’ आमुख के अनुसार, इस उपन्यास को लिखने से पहले नागर जी ने तुलसीदास द्वारा रचित ‘विनयपत्रिका’ को खास तौर से पढ़ा था। ‘मानस का हंस’ (1972 ई.) तुलसीदास की जीवनी एवं व्यक्तित्व पर आधारित औपन्यासिक कृति है तथा इसके रचनाकार अमृतलाल नागर हैं। इनके उपन्यासों को रामविलास शर्मा ने ‘हिन्दी के गैर मानक रूपों का पिटारा’ कहा है। अमृतलाल नागर द्वारा रचित प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं-महाकाल (1947 ई.), सेठ बाँकेलाल (1955 ई.), बूँद और समुद्र (1956 ई.), शतरंज के मोहरे (1959 ई.), सुहाग के नूपुर (1960 ई.), अमृत और विष (1966 ई.), सात घूँघट वाला मुखड़ा (1968 ई.), एकदा नैमिषारण्ये (1972 ई.), नाच्यौं बहुत गोपाल (1978 ई.), खंजन नयन (1981 ई.), बिखरे तिनके (1982 ई.), अग्निगर्भा (1983 ई.), करवट (1985 ई.), पीढि़याँ (1990 ई.)।