Correct Answer:
Option B - हेनरी विवियन डिरोजिओ कलकत्ता के हिन्दू कॉलेज में अध्यापक थे। ये ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के प्रवर्तक थे। वे फ्रांस की क्रांति से प्रभावित थे। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने, सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, मुक्ति, समानता, स्वतंत्रता से प्रेम करने और सत्य की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। डेरोजियो के अनुयायियों ने सभी प्राचीन जर्जर परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विरोध किया। आत्मिक उन्नति और समाज सुधार के लिए उन्होंने एकेडमिक एसोसिएशन और सोसायटी फॉर द एक्वीजीशन ऑफ जनरल नॉलेज जैसे संगठनों की स्थापना की, तथा ऐग्लो-इंडियन हिन्दू एसोसिएशन, बंगहित सभा और डिबेटिंग क्लब आदि का भी गठन किया। इस आंदोलन के मुख्य मुद्दे थे- प्रेस की स्वतंत्रता, जमींदारो के अत्याचारों से रैयतों की सुरक्षा, सरकारी उच्च सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति आदि। यह आंदोलन स्वभाव से अतिवादी था। इसकी उग्रता के कारण यह सफल नहीं हो सका फिर भी आने वाले वर्षों में यंग बंगाल आंदोलन सभी भावी सुधारकों और राष्ट्र प्रेमियों के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बन गया।
नोट- प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पाण्डुरंग द्वारा 1867 ई. में मुम्बई में की गयी थी जबकि मोतीलाल घोष एवं शिशिर कुमार घोष ने कलकत्ता से बांग्ला भाषा में अमृत बाजार पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया।
B. हेनरी विवियन डिरोजिओ कलकत्ता के हिन्दू कॉलेज में अध्यापक थे। ये ‘यंग बंगाल आन्दोलन’ के प्रवर्तक थे। वे फ्रांस की क्रांति से प्रभावित थे। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने, सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, मुक्ति, समानता, स्वतंत्रता से प्रेम करने और सत्य की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। डेरोजियो के अनुयायियों ने सभी प्राचीन जर्जर परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विरोध किया। आत्मिक उन्नति और समाज सुधार के लिए उन्होंने एकेडमिक एसोसिएशन और सोसायटी फॉर द एक्वीजीशन ऑफ जनरल नॉलेज जैसे संगठनों की स्थापना की, तथा ऐग्लो-इंडियन हिन्दू एसोसिएशन, बंगहित सभा और डिबेटिंग क्लब आदि का भी गठन किया। इस आंदोलन के मुख्य मुद्दे थे- प्रेस की स्वतंत्रता, जमींदारो के अत्याचारों से रैयतों की सुरक्षा, सरकारी उच्च सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति आदि। यह आंदोलन स्वभाव से अतिवादी था। इसकी उग्रता के कारण यह सफल नहीं हो सका फिर भी आने वाले वर्षों में यंग बंगाल आंदोलन सभी भावी सुधारकों और राष्ट्र प्रेमियों के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बन गया।
नोट- प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पाण्डुरंग द्वारा 1867 ई. में मुम्बई में की गयी थी जबकि मोतीलाल घोष एवं शिशिर कुमार घोष ने कलकत्ता से बांग्ला भाषा में अमृत बाजार पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया।