Correct Answer:
Option B - ‘‘इसका अध्ययन हिन्दी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी अपने लोक प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस की रचना की।’’ उपर्युक्त कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ‘जायसी’ के संदर्भ में कहा गया है।
जायसी सूफी या प्रेममार्गी शाखा के प्रमुख कवि थे। इनके द्वारा रचित पद्मावत महाकाव्य में कुल 57 खण्ड हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने जायसी कृत तीन ग्रन्थों का उल्लेख किया है-
(1) पद्मावत (2) अखरावट (3) आखिरी कलाम
सूरदास - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी।
B. ‘‘इसका अध्ययन हिन्दी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी अपने लोक प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस की रचना की।’’ उपर्युक्त कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ‘जायसी’ के संदर्भ में कहा गया है।
जायसी सूफी या प्रेममार्गी शाखा के प्रमुख कवि थे। इनके द्वारा रचित पद्मावत महाकाव्य में कुल 57 खण्ड हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने जायसी कृत तीन ग्रन्थों का उल्लेख किया है-
(1) पद्मावत (2) अखरावट (3) आखिरी कलाम
सूरदास - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी।