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Q: .
  • A. (A), (C), (D)
  • B. (A), (D), (E)
  • C. (A), (B), (E)
  • D. (B), (C), (E)
Correct Answer: Option C - आवारा मसीहा के आधार पर असत्य कथन है। (A) नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में देशबंधु चाहते थे कि असहयोग का प्रस्ताव पास हो। (B) देशबन्धु अपने खर्चे पर 200 प्रतिनिधियों का दल लेकर आए थे। (E) देशबंधु के वकालत छोड़ने के समय शरत् बाबू बड़ोदरा में रहते थे। ⇒ ‘आवारा मसीहा’ विष्णु प्रभाकर कृत बंग्ला के अमर कथाशिल्पी शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रामाणिक जीवन-गाथा है। इसका प्रथम संस्करण मार्च 1974 में प्रकाशित हुआ था। विष्णु प्रभाकर को इस जीवनी को लिखने में 14 वर्ष लगे। यह तीन पर्वों में विभाजित है जो इस प्रकार हैं- 1- प्रथम पर्व - दिशाहारा - इससे 18 उपशीर्षक है। 2- द्वितीय पर्व - दिशा की खोज - इससे भी 18 उपशीर्षक है। 3- तृतीय पर्व - दिशांत - इससे 29 उपशीर्षक है।
C. आवारा मसीहा के आधार पर असत्य कथन है। (A) नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में देशबंधु चाहते थे कि असहयोग का प्रस्ताव पास हो। (B) देशबन्धु अपने खर्चे पर 200 प्रतिनिधियों का दल लेकर आए थे। (E) देशबंधु के वकालत छोड़ने के समय शरत् बाबू बड़ोदरा में रहते थे। ⇒ ‘आवारा मसीहा’ विष्णु प्रभाकर कृत बंग्ला के अमर कथाशिल्पी शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रामाणिक जीवन-गाथा है। इसका प्रथम संस्करण मार्च 1974 में प्रकाशित हुआ था। विष्णु प्रभाकर को इस जीवनी को लिखने में 14 वर्ष लगे। यह तीन पर्वों में विभाजित है जो इस प्रकार हैं- 1- प्रथम पर्व - दिशाहारा - इससे 18 उपशीर्षक है। 2- द्वितीय पर्व - दिशा की खोज - इससे भी 18 उपशीर्षक है। 3- तृतीय पर्व - दिशांत - इससे 29 उपशीर्षक है।

Explanations:

आवारा मसीहा के आधार पर असत्य कथन है। (A) नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में देशबंधु चाहते थे कि असहयोग का प्रस्ताव पास हो। (B) देशबन्धु अपने खर्चे पर 200 प्रतिनिधियों का दल लेकर आए थे। (E) देशबंधु के वकालत छोड़ने के समय शरत् बाबू बड़ोदरा में रहते थे। ⇒ ‘आवारा मसीहा’ विष्णु प्रभाकर कृत बंग्ला के अमर कथाशिल्पी शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रामाणिक जीवन-गाथा है। इसका प्रथम संस्करण मार्च 1974 में प्रकाशित हुआ था। विष्णु प्रभाकर को इस जीवनी को लिखने में 14 वर्ष लगे। यह तीन पर्वों में विभाजित है जो इस प्रकार हैं- 1- प्रथम पर्व - दिशाहारा - इससे 18 उपशीर्षक है। 2- द्वितीय पर्व - दिशा की खोज - इससे भी 18 उपशीर्षक है। 3- तृतीय पर्व - दिशांत - इससे 29 उपशीर्षक है।