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  • A. 1 2 3 4
  • B. 2 3 4 1
  • C. 3 4 1 2
  • D. 4 3 2 1
Correct Answer: Option D - ऋषभनाथ-ये जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे। वे जम्बूद्वीप के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे और वृद्धावस्था में अपने पुत्र भरत को राज्य देकर स्वयं तीर्थंकर हो गये थे। इनका जन्म स्थान अयोध्या था। इनका वर्णन ऋग्वेद (सर्वप्रथम), यजुर्वेद, विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में मिलता है। भागवत पुराण में इन्हें विष्णु का अवतार कहा गया है। द्वितीय तीर्थंकर अजीतनाथ का जन्म भी अयोध्या में हुआ था। सम्भवनाथ-जैन धर्म के तीसरे तीर्थकर थे, इनका जन्म श्रावस्ती में हुआ था। पद्मनाथ-ये जैन धर्म के 6वें तीर्थंकर थे। इनका जन्म कौशाम्बी में हुआ था। मध्ययुगीन जैनग्रंथों में कौशाम्बी को विविध तीर्थकल्प कहा गया है। यह स्थान बौद्ध धर्म का भी तीर्थ स्थल माना जाता है। इनका संबंध कौशाम्बी के प्रभासगिरी क्षेत्र से है। पार्श्वनाथ-जैनधर्म के 23वें तीर्थंकर थे। ये वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र थे। उनका विवाह कुशस्थल देश की राजकुमारी प्रभावती के साथ हुआ था।
D. ऋषभनाथ-ये जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे। वे जम्बूद्वीप के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे और वृद्धावस्था में अपने पुत्र भरत को राज्य देकर स्वयं तीर्थंकर हो गये थे। इनका जन्म स्थान अयोध्या था। इनका वर्णन ऋग्वेद (सर्वप्रथम), यजुर्वेद, विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में मिलता है। भागवत पुराण में इन्हें विष्णु का अवतार कहा गया है। द्वितीय तीर्थंकर अजीतनाथ का जन्म भी अयोध्या में हुआ था। सम्भवनाथ-जैन धर्म के तीसरे तीर्थकर थे, इनका जन्म श्रावस्ती में हुआ था। पद्मनाथ-ये जैन धर्म के 6वें तीर्थंकर थे। इनका जन्म कौशाम्बी में हुआ था। मध्ययुगीन जैनग्रंथों में कौशाम्बी को विविध तीर्थकल्प कहा गया है। यह स्थान बौद्ध धर्म का भी तीर्थ स्थल माना जाता है। इनका संबंध कौशाम्बी के प्रभासगिरी क्षेत्र से है। पार्श्वनाथ-जैनधर्म के 23वें तीर्थंकर थे। ये वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र थे। उनका विवाह कुशस्थल देश की राजकुमारी प्रभावती के साथ हुआ था।

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ऋषभनाथ-ये जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे। वे जम्बूद्वीप के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे और वृद्धावस्था में अपने पुत्र भरत को राज्य देकर स्वयं तीर्थंकर हो गये थे। इनका जन्म स्थान अयोध्या था। इनका वर्णन ऋग्वेद (सर्वप्रथम), यजुर्वेद, विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में मिलता है। भागवत पुराण में इन्हें विष्णु का अवतार कहा गया है। द्वितीय तीर्थंकर अजीतनाथ का जन्म भी अयोध्या में हुआ था। सम्भवनाथ-जैन धर्म के तीसरे तीर्थकर थे, इनका जन्म श्रावस्ती में हुआ था। पद्मनाथ-ये जैन धर्म के 6वें तीर्थंकर थे। इनका जन्म कौशाम्बी में हुआ था। मध्ययुगीन जैनग्रंथों में कौशाम्बी को विविध तीर्थकल्प कहा गया है। यह स्थान बौद्ध धर्म का भी तीर्थ स्थल माना जाता है। इनका संबंध कौशाम्बी के प्रभासगिरी क्षेत्र से है। पार्श्वनाथ-जैनधर्म के 23वें तीर्थंकर थे। ये वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र थे। उनका विवाह कुशस्थल देश की राजकुमारी प्रभावती के साथ हुआ था।