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  • A. (A), (B), (C), (D), (E)
  • B. (D), (B), (C), (A), (E)
  • C. (B), (C), (D), (A), (E)
  • D. (B), (E), (D), (C), (A)
Correct Answer: Option B - नागार्जुन के उपन्यासों का सही कालक्रम इस प्रकार है- रतिनाथ की चाची (1948), बलचनमा (1952), नई पौध (1953), बाबा बटेसरनाथ (1954), वरुण के बेटे (1957)। ⇒ नागार्जुन आंचलिक उपन्यासकार है। इन्होंने ने मिथिलांचल के गाँवों को अपनी कथा का आधार बनाया है। ⇒ ‘रतिनाथ की चाची’ एक मैथिल विधवा के जीवन पर केन्द्रित है। यह उपन्यास मिथिलांचल एवं मैथिल ब्राह्मण समाज के अन्तर्विरोधों को उजागर करता है। ⇒ ‘बलचनामा’ आजादी से पूर्व के दरभंगा जिले को केन्द्र में रखकर विकसित होता है। इसका नायक बलचनामा दलित युवक राजनीति के दाँव सीखने के पश्चात् अन्याय एवं अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करता है। ⇒ ‘नयी पौध’ में अनमेल विवाह एवं अप्रासंगिक रूढि़यों के विरोध का चित्रण हुआ है। ⇒ ‘बाबा बटेसरनाथ’ में बरगद के वृक्ष को बचाने हेतु किए गये किसानों के संघर्ष का चित्रण है। ⇒ ‘वरूण के बेटे’ उपन्यास में मिथिला के जमींदारों के विरूद्ध वहाँ के मछुआरों के संघर्ष का अंकन हुआ है।
B. नागार्जुन के उपन्यासों का सही कालक्रम इस प्रकार है- रतिनाथ की चाची (1948), बलचनमा (1952), नई पौध (1953), बाबा बटेसरनाथ (1954), वरुण के बेटे (1957)। ⇒ नागार्जुन आंचलिक उपन्यासकार है। इन्होंने ने मिथिलांचल के गाँवों को अपनी कथा का आधार बनाया है। ⇒ ‘रतिनाथ की चाची’ एक मैथिल विधवा के जीवन पर केन्द्रित है। यह उपन्यास मिथिलांचल एवं मैथिल ब्राह्मण समाज के अन्तर्विरोधों को उजागर करता है। ⇒ ‘बलचनामा’ आजादी से पूर्व के दरभंगा जिले को केन्द्र में रखकर विकसित होता है। इसका नायक बलचनामा दलित युवक राजनीति के दाँव सीखने के पश्चात् अन्याय एवं अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करता है। ⇒ ‘नयी पौध’ में अनमेल विवाह एवं अप्रासंगिक रूढि़यों के विरोध का चित्रण हुआ है। ⇒ ‘बाबा बटेसरनाथ’ में बरगद के वृक्ष को बचाने हेतु किए गये किसानों के संघर्ष का चित्रण है। ⇒ ‘वरूण के बेटे’ उपन्यास में मिथिला के जमींदारों के विरूद्ध वहाँ के मछुआरों के संघर्ष का अंकन हुआ है।

Explanations:

नागार्जुन के उपन्यासों का सही कालक्रम इस प्रकार है- रतिनाथ की चाची (1948), बलचनमा (1952), नई पौध (1953), बाबा बटेसरनाथ (1954), वरुण के बेटे (1957)। ⇒ नागार्जुन आंचलिक उपन्यासकार है। इन्होंने ने मिथिलांचल के गाँवों को अपनी कथा का आधार बनाया है। ⇒ ‘रतिनाथ की चाची’ एक मैथिल विधवा के जीवन पर केन्द्रित है। यह उपन्यास मिथिलांचल एवं मैथिल ब्राह्मण समाज के अन्तर्विरोधों को उजागर करता है। ⇒ ‘बलचनामा’ आजादी से पूर्व के दरभंगा जिले को केन्द्र में रखकर विकसित होता है। इसका नायक बलचनामा दलित युवक राजनीति के दाँव सीखने के पश्चात् अन्याय एवं अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करता है। ⇒ ‘नयी पौध’ में अनमेल विवाह एवं अप्रासंगिक रूढि़यों के विरोध का चित्रण हुआ है। ⇒ ‘बाबा बटेसरनाथ’ में बरगद के वृक्ष को बचाने हेतु किए गये किसानों के संघर्ष का चित्रण है। ⇒ ‘वरूण के बेटे’ उपन्यास में मिथिला के जमींदारों के विरूद्ध वहाँ के मछुआरों के संघर्ष का अंकन हुआ है।