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  • A.
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Correct Answer: Option C - भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुदेश प्रपत्र ‘‘(इन्स्ट्रूमेन्ट ऑफ इन्स्ट्रक्शन)’’ को निदेशक तत्वों (भाग-4, अनुच्छेद-(36-51)) के रूप में समाहित कर लिया गया था, जिनका उद्देश्य शासन के लिए सकारात्मक उद्देश्य (विधि निर्माण में) प्रस्तुत करना व आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र की (अनुच्छेद-38) स्थापना करना है। इनकी प्रकृति गैर-न्यायोचित है (अनुच्छेद-37) यानी कि उनके हनन पर उन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता अर्थात् ये राज्य के ऊपर बाध्यता न होकर कर्तव्य के समान है। इसमें निर्धारित सिद्धांत देश के शासन में मूल हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कई बार व्यवस्था दी है कि किसी विधि की संवैधानिकता का निर्धारण करते समय निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 या 19 के संबंध में तर्क संगत मानते हुए असंवैधानिकता से बचा सकता है। वर्तमान स्थिति में मूल अधिकार, निदेशक तत्वों पर प्रभावी हैं (अनुच्छेद 39 (B) व (C) को छोड़कर)। अनुच्छेद 39ग के तहत धन के केन्द्रीकरण को अहितकारी बताया गया है।
C. भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुदेश प्रपत्र ‘‘(इन्स्ट्रूमेन्ट ऑफ इन्स्ट्रक्शन)’’ को निदेशक तत्वों (भाग-4, अनुच्छेद-(36-51)) के रूप में समाहित कर लिया गया था, जिनका उद्देश्य शासन के लिए सकारात्मक उद्देश्य (विधि निर्माण में) प्रस्तुत करना व आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र की (अनुच्छेद-38) स्थापना करना है। इनकी प्रकृति गैर-न्यायोचित है (अनुच्छेद-37) यानी कि उनके हनन पर उन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता अर्थात् ये राज्य के ऊपर बाध्यता न होकर कर्तव्य के समान है। इसमें निर्धारित सिद्धांत देश के शासन में मूल हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कई बार व्यवस्था दी है कि किसी विधि की संवैधानिकता का निर्धारण करते समय निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 या 19 के संबंध में तर्क संगत मानते हुए असंवैधानिकता से बचा सकता है। वर्तमान स्थिति में मूल अधिकार, निदेशक तत्वों पर प्रभावी हैं (अनुच्छेद 39 (B) व (C) को छोड़कर)। अनुच्छेद 39ग के तहत धन के केन्द्रीकरण को अहितकारी बताया गया है।

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भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुदेश प्रपत्र ‘‘(इन्स्ट्रूमेन्ट ऑफ इन्स्ट्रक्शन)’’ को निदेशक तत्वों (भाग-4, अनुच्छेद-(36-51)) के रूप में समाहित कर लिया गया था, जिनका उद्देश्य शासन के लिए सकारात्मक उद्देश्य (विधि निर्माण में) प्रस्तुत करना व आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र की (अनुच्छेद-38) स्थापना करना है। इनकी प्रकृति गैर-न्यायोचित है (अनुच्छेद-37) यानी कि उनके हनन पर उन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता अर्थात् ये राज्य के ऊपर बाध्यता न होकर कर्तव्य के समान है। इसमें निर्धारित सिद्धांत देश के शासन में मूल हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कई बार व्यवस्था दी है कि किसी विधि की संवैधानिकता का निर्धारण करते समय निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 या 19 के संबंध में तर्क संगत मानते हुए असंवैधानिकता से बचा सकता है। वर्तमान स्थिति में मूल अधिकार, निदेशक तत्वों पर प्रभावी हैं (अनुच्छेद 39 (B) व (C) को छोड़कर)। अनुच्छेद 39ग के तहत धन के केन्द्रीकरण को अहितकारी बताया गया है।