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Q: नर्तकी-पदे प्रत्ययोऽस्ति –
  • A. सामान्यप्रकारेण ङीष्
  • B. विकल्पेन ङीष्
  • C. सामान्य प्रकारेण ङीन्
  • D. विकल्पेन ङीन्
Correct Answer: Option A - ‘नर्तकी’ पदे सामान्य प्रकारेण ङीष् प्रत्ययोऽस्ति। अर्थात् ‘नर्तकी’ पद सामान्य प्रकार से (षिद्गौरादिभ्यश्च सूत्र से) ङीष् प्रत्यय जुड़कर निष्पन्न हुआ है अत: विकल्प (a) सही है शेष अन्य विकल्पों में (b) विकल्प में ङीष् प्रत्यय होने को कहता है जैसे- शकटी (शकटि:), रात्री: (रात्रि:), मृद्वी (मृदु:) तथा बह्वी (बहु:) आदि। अत: विकल्प (c) नित्य से (सामान्य) ङीन् का विधान करने को कहता है जैसे- शार्ङ्गरवी, बैदी, ब्राह्मणी आदि।
A. ‘नर्तकी’ पदे सामान्य प्रकारेण ङीष् प्रत्ययोऽस्ति। अर्थात् ‘नर्तकी’ पद सामान्य प्रकार से (षिद्गौरादिभ्यश्च सूत्र से) ङीष् प्रत्यय जुड़कर निष्पन्न हुआ है अत: विकल्प (a) सही है शेष अन्य विकल्पों में (b) विकल्प में ङीष् प्रत्यय होने को कहता है जैसे- शकटी (शकटि:), रात्री: (रात्रि:), मृद्वी (मृदु:) तथा बह्वी (बहु:) आदि। अत: विकल्प (c) नित्य से (सामान्य) ङीन् का विधान करने को कहता है जैसे- शार्ङ्गरवी, बैदी, ब्राह्मणी आदि।

Explanations:

‘नर्तकी’ पदे सामान्य प्रकारेण ङीष् प्रत्ययोऽस्ति। अर्थात् ‘नर्तकी’ पद सामान्य प्रकार से (षिद्गौरादिभ्यश्च सूत्र से) ङीष् प्रत्यय जुड़कर निष्पन्न हुआ है अत: विकल्प (a) सही है शेष अन्य विकल्पों में (b) विकल्प में ङीष् प्रत्यय होने को कहता है जैसे- शकटी (शकटि:), रात्री: (रात्रि:), मृद्वी (मृदु:) तथा बह्वी (बहु:) आदि। अत: विकल्प (c) नित्य से (सामान्य) ङीन् का विधान करने को कहता है जैसे- शार्ङ्गरवी, बैदी, ब्राह्मणी आदि।