Explanations:
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। पर्यावरण को पाठ्यपुस्तक में निम्न का समावेश होना चाहिए। - 1. बच्चों को खोज के अवसर दें। 2. आलोचनात्मक चिंतन को बढावा देने वाले अभ्यास हो। 3. बच्चों को अपने विचार प्रकट करने का अवसर देना 4. पर्यावरण अध्ययन की पढ़ाई को कक्षा की चारदीवारी के बाहर से जोड़ा जाये।