Correct Answer:
Option D - ‘भोलाराम का जीव- व्यंग्य’, आवारा मसीहा - जीवनी’ रचना और उनकी विधा के साथ सुमेलित युग्म है।
⇒ ‘भोलाराम का जीव- व्यंग्य’ हरिशंकर परसाई की ऐसी कहानी है जिसमें व्यंग्य की तीखी मार स्पष्ट झलकती है। इस कहानी में सामाजिक विसंगतियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को केन्द्र में रखा गया है। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और सिफारिश का जो आलम है उसे व्यंग्य-विनोद के सहारे ‘भोलाराम का जीव’ में अभिव्यक्त किया गया है।
हरिशंकर परसाई के कहानी संग्रह:-
दो नाक वाले लोग, हसते हैं रोते हैं, भोलाराम का जीव।
⇒ मुर्दहिया डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा है। यह सात अध्यायों में विभाजित है। लेखक ने अपनी आत्मकथा में एक साथ दो पीड़ाओं की अभिव्यक्ति की है एक तो जातिगत भेदभाव जनित-पीड़ा थी जो उन्हें समाज में झेलनी पड़ती थी दूसरी पीड़ा उन्हें (कनवा) एक आँख के चले जाने के कारण झेलनी पड़ती थी। इसमें लेखक के आरंभिक पढ़ाई से लेकर मैट्रिक तक की पढ़ाई का चित्रण है।
D. ‘भोलाराम का जीव- व्यंग्य’, आवारा मसीहा - जीवनी’ रचना और उनकी विधा के साथ सुमेलित युग्म है।
⇒ ‘भोलाराम का जीव- व्यंग्य’ हरिशंकर परसाई की ऐसी कहानी है जिसमें व्यंग्य की तीखी मार स्पष्ट झलकती है। इस कहानी में सामाजिक विसंगतियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को केन्द्र में रखा गया है। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और सिफारिश का जो आलम है उसे व्यंग्य-विनोद के सहारे ‘भोलाराम का जीव’ में अभिव्यक्त किया गया है।
हरिशंकर परसाई के कहानी संग्रह:-
दो नाक वाले लोग, हसते हैं रोते हैं, भोलाराम का जीव।
⇒ मुर्दहिया डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा है। यह सात अध्यायों में विभाजित है। लेखक ने अपनी आत्मकथा में एक साथ दो पीड़ाओं की अभिव्यक्ति की है एक तो जातिगत भेदभाव जनित-पीड़ा थी जो उन्हें समाज में झेलनी पड़ती थी दूसरी पीड़ा उन्हें (कनवा) एक आँख के चले जाने के कारण झेलनी पड़ती थी। इसमें लेखक के आरंभिक पढ़ाई से लेकर मैट्रिक तक की पढ़ाई का चित्रण है।