Correct Answer:
Option C - अन्तरिक्ष में घूमते धूल और गैस के पिण्ड जब पृथ्वी के समीप से गुजरते हैं तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तेजी से पृथ्वी की ओर आ जाते हैं और पृथ्वी के वायुमण्डल में आकर घर्षण से चमकने लगते हैं, जो पृथ्वी पर पहुँचने से पूर्व ही जलकर राख हो जाते हैं, उन्हें उल्का पिण्ड कहते हैं। इन पिण्डों को ही भ्रमवश टूटा हुआ तारा समझ लिया जाता है।
- मंगल व बृहस्पति की कक्षाओं के बीच मुख्य रूप से सूर्य की परिक्रमा करने वाले छोटे आकाशीय पिण्ड (विभिन्न प्रकार के चट्टानी मलबे) क्षुद्रग्रह (Asteroids) कहलाते हैं।
- तारों का चमकना उनके ताप के कारण होता है। तारों का मुख्य संघटक हाइड्रोजन व हीलियम हैं।
- ग्रह वे खगोलीय पिण्ड हैं, जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं जैसे– पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति बुध, शुक्र आदि।
C. अन्तरिक्ष में घूमते धूल और गैस के पिण्ड जब पृथ्वी के समीप से गुजरते हैं तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तेजी से पृथ्वी की ओर आ जाते हैं और पृथ्वी के वायुमण्डल में आकर घर्षण से चमकने लगते हैं, जो पृथ्वी पर पहुँचने से पूर्व ही जलकर राख हो जाते हैं, उन्हें उल्का पिण्ड कहते हैं। इन पिण्डों को ही भ्रमवश टूटा हुआ तारा समझ लिया जाता है।
- मंगल व बृहस्पति की कक्षाओं के बीच मुख्य रूप से सूर्य की परिक्रमा करने वाले छोटे आकाशीय पिण्ड (विभिन्न प्रकार के चट्टानी मलबे) क्षुद्रग्रह (Asteroids) कहलाते हैं।
- तारों का चमकना उनके ताप के कारण होता है। तारों का मुख्य संघटक हाइड्रोजन व हीलियम हैं।
- ग्रह वे खगोलीय पिण्ड हैं, जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं जैसे– पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति बुध, शुक्र आदि।