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Q: बाँधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से। मणिवाले फणियों का मुख, क्यों भरा हुआ हीरों से।। इन काव्य-पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
  • A. अनुप्रास
  • B. श्लेष
  • C. यमक
  • D. अतिशयोक्ति
Correct Answer: Option D - बाँधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से। मणिवाले फणियों का मुख, क्यों भरा हुआ हीरों से।। इन काव्य-पंक्तियों में अतिशयोक्ति अलंकार है। जहाँ किसी का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि सीमा या मर्यादा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ ‘अतिशयोक्ति’ अलंकार होता है। उपर्युक्त उदाहरण में मोतियों से भरी हुई प्रिया की माँग का कवि ने वर्णन किया है। विधु या चन्द्र से मुख का, काली जंजीरों से केश और मणिवाले फणियों से मोती भरी माँग का बोध होता है।
D. बाँधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से। मणिवाले फणियों का मुख, क्यों भरा हुआ हीरों से।। इन काव्य-पंक्तियों में अतिशयोक्ति अलंकार है। जहाँ किसी का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि सीमा या मर्यादा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ ‘अतिशयोक्ति’ अलंकार होता है। उपर्युक्त उदाहरण में मोतियों से भरी हुई प्रिया की माँग का कवि ने वर्णन किया है। विधु या चन्द्र से मुख का, काली जंजीरों से केश और मणिवाले फणियों से मोती भरी माँग का बोध होता है।

Explanations:

बाँधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से। मणिवाले फणियों का मुख, क्यों भरा हुआ हीरों से।। इन काव्य-पंक्तियों में अतिशयोक्ति अलंकार है। जहाँ किसी का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि सीमा या मर्यादा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ ‘अतिशयोक्ति’ अलंकार होता है। उपर्युक्त उदाहरण में मोतियों से भरी हुई प्रिया की माँग का कवि ने वर्णन किया है। विधु या चन्द्र से मुख का, काली जंजीरों से केश और मणिवाले फणियों से मोती भरी माँग का बोध होता है।