Correct Answer:
Option C - रेशे का वह गुण जिसमें रेशों को दबाने के पश्चात् छोड़ देने पर वह पुन: अपना पूर्व आयतन प्राप्त कर लेता है। यह प्रक्रिया प्रतिस्कंदता कहलाती है। रेशो में उपस्थित प्रतिस्कंदता के गुण के कारण ही वस्त्र में शीघ्रता से शिकन नहीं पड़ती है। वस्त्रों को दैनिक प्रयोग के पश्चात् टाँगना, मोड़ना अथवा लपेटना पड़ता है जिससे उनकी तहे अक्सर मुड़ जाती है अथवा विकृत हो जाती है। परन्तु फिर भी वे वस्त्र प्रतिस्कंदता के गुण के कारण ही अपनी पूर्वाकृति प्राप्त कर लेती हैं।
C. रेशे का वह गुण जिसमें रेशों को दबाने के पश्चात् छोड़ देने पर वह पुन: अपना पूर्व आयतन प्राप्त कर लेता है। यह प्रक्रिया प्रतिस्कंदता कहलाती है। रेशो में उपस्थित प्रतिस्कंदता के गुण के कारण ही वस्त्र में शीघ्रता से शिकन नहीं पड़ती है। वस्त्रों को दैनिक प्रयोग के पश्चात् टाँगना, मोड़ना अथवा लपेटना पड़ता है जिससे उनकी तहे अक्सर मुड़ जाती है अथवा विकृत हो जाती है। परन्तु फिर भी वे वस्त्र प्रतिस्कंदता के गुण के कारण ही अपनी पूर्वाकृति प्राप्त कर लेती हैं।