Correct Answer:
Option D - कर्मयोग का सिद्धान्त ‘श्रीमद्भगवद्गीता में’ प्रतिपादित है। अर्थात् गीता में वर्णित प्रमुख योग इस प्रकार है- कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, गीता में कहा भी कहा गया है -‘कर्मयोगेन योगिनाम्’ अर्थात् - योगियों की निष्ठा कर्मयोग से होती है।
D. कर्मयोग का सिद्धान्त ‘श्रीमद्भगवद्गीता में’ प्रतिपादित है। अर्थात् गीता में वर्णित प्रमुख योग इस प्रकार है- कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, गीता में कहा भी कहा गया है -‘कर्मयोगेन योगिनाम्’ अर्थात् - योगियों की निष्ठा कर्मयोग से होती है।