Correct Answer:
Option D - ‘उसमें भीतर से प्रेम का एक स्वर्गीय स्वरूप झाँक रहा है-केवल झाँक रहा है निर्लज्जता के साथ पुकार या कराह नहीं रहा है’’ कहानी ‘उसने कहा था’ के सम्बन्ध में यह टिप्पणी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की है। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने तीन कहानियाँ लिखी हैं, जो निम्न हैं- सुखमय जीवन (1911 ई.), बुद्धू का काँटा (1914 ई.), उसने कहा था (1915 ई.)। ‘उसने कहा था’ प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई प्रेम-संवेदना की कहानी है। यह फ्लैश बैक (पूर्वदीप्ति) पद्धति पर लिखी हिन्दी की प्रथम कहानी है।
D. ‘उसमें भीतर से प्रेम का एक स्वर्गीय स्वरूप झाँक रहा है-केवल झाँक रहा है निर्लज्जता के साथ पुकार या कराह नहीं रहा है’’ कहानी ‘उसने कहा था’ के सम्बन्ध में यह टिप्पणी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की है। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने तीन कहानियाँ लिखी हैं, जो निम्न हैं- सुखमय जीवन (1911 ई.), बुद्धू का काँटा (1914 ई.), उसने कहा था (1915 ई.)। ‘उसने कहा था’ प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई प्रेम-संवेदना की कहानी है। यह फ्लैश बैक (पूर्वदीप्ति) पद्धति पर लिखी हिन्दी की प्रथम कहानी है।