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Q: ,
  • A. 22 अप्रैल, 1858 ई.
  • B. 23 अप्रैल, 1858 ई.
  • C. 20 अप्रैल, 1858 ई.
  • D. 25 अप्रैल, 1858 ई.
Correct Answer: Option A - कुँवर सिंह सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे। कई युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित कर कुँवर सिंह 22 अप्रैल, 1858 को पुन: जगदीशपुर में प्रविष्ट हुए। इन्होंने 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी। ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को उन्होंने बुरी तरह खदेड़ दिया। उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से अंग्रेजों का ‘यूनियन जैक’ नाम का झण्डा उतार कर ही दम लिया। वहाँ से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति प्राप्त की।
A. कुँवर सिंह सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे। कई युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित कर कुँवर सिंह 22 अप्रैल, 1858 को पुन: जगदीशपुर में प्रविष्ट हुए। इन्होंने 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी। ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को उन्होंने बुरी तरह खदेड़ दिया। उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से अंग्रेजों का ‘यूनियन जैक’ नाम का झण्डा उतार कर ही दम लिया। वहाँ से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति प्राप्त की।

Explanations:

कुँवर सिंह सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे। कई युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित कर कुँवर सिंह 22 अप्रैल, 1858 को पुन: जगदीशपुर में प्रविष्ट हुए। इन्होंने 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी। ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को उन्होंने बुरी तरह खदेड़ दिया। उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से अंग्रेजों का ‘यूनियन जैक’ नाम का झण्डा उतार कर ही दम लिया। वहाँ से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति प्राप्त की।