search
Q: .
  • A. कैट-क्राई-सिन्ड्रोम एवं मिनमाता
  • B. उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) एवं मैरासमस
  • C. मैरासमस एवं क्वाशियोरकॉर
  • D. मिनमाता एवं फ्लुओरोसिस
Correct Answer: Option D - मिनमाता एवं फ्लुओरोसिस दोनों प्रदूषण से होने वाले रोग हैं। मिनमाता रोग जल में उपस्थित पारा (Hg) की अधिकता से होता है। ज्ञातव्य है कि पारायुक्त जल से प्रभावित मछलियों के सेवन से 1956 में जापान में मिनमाता बीमारी से अनेक लोगों की मौत हो गई थी। यह बीमारी पहली बार जापान के मिनमाता खाड़ी के आस–पास रहने वालों में देखी गई इस कारण इसे मिनमाता रोग कहा जाने लगा। पेयजल में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लुओरोसिस नामक रोग हो जाता है जिससे दाँत एवं हड्डिया कमजोर हो जाती है।
D. मिनमाता एवं फ्लुओरोसिस दोनों प्रदूषण से होने वाले रोग हैं। मिनमाता रोग जल में उपस्थित पारा (Hg) की अधिकता से होता है। ज्ञातव्य है कि पारायुक्त जल से प्रभावित मछलियों के सेवन से 1956 में जापान में मिनमाता बीमारी से अनेक लोगों की मौत हो गई थी। यह बीमारी पहली बार जापान के मिनमाता खाड़ी के आस–पास रहने वालों में देखी गई इस कारण इसे मिनमाता रोग कहा जाने लगा। पेयजल में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लुओरोसिस नामक रोग हो जाता है जिससे दाँत एवं हड्डिया कमजोर हो जाती है।

Explanations:

मिनमाता एवं फ्लुओरोसिस दोनों प्रदूषण से होने वाले रोग हैं। मिनमाता रोग जल में उपस्थित पारा (Hg) की अधिकता से होता है। ज्ञातव्य है कि पारायुक्त जल से प्रभावित मछलियों के सेवन से 1956 में जापान में मिनमाता बीमारी से अनेक लोगों की मौत हो गई थी। यह बीमारी पहली बार जापान के मिनमाता खाड़ी के आस–पास रहने वालों में देखी गई इस कारण इसे मिनमाता रोग कहा जाने लगा। पेयजल में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लुओरोसिस नामक रोग हो जाता है जिससे दाँत एवं हड्डिया कमजोर हो जाती है।